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कलम बेचैन हो उठती है

                
                                                         
                            जब भी अकेले में
                                                                 
                            
सोचती हूं
किसी की बातें
अंधेरी रातें
दिन के उजाले
धरती बनाने वाले
ईश्वर,
हवा, पानी
सुंदर सुंदर
पेड़, पौधे
प्रकृति की
सुकोमलता,
तालाब,नदियां
फूल,कलियां
अदभुत
दृश्य,
मन को हरने वाले
नीचे, हम सब रहने वाले
प्यार के जोत जलाने वाले
हंसने और हंसाने वाले
किसी की उदासी
किसी की हंसी
कोई रोता है
कोई हंसता है
कोई पाता है
कोई खोता है
कोई सुखी है
कोई दुखी है
ईश्वर के भी महिमा
निराले
बस,
कलम बेचैन हो उठती है
कलम चल पड़ती है।।
-ममता तिवारी
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5 महीने पहले

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