विज्ञापन

जब धरती मां हमारी सजती हैं: कविता

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हरी जड़ी बूटीदार लहंगा पहन
        
                                                    
                            
जब धरती मां हमारी सजती हैं
दिल को अद्भुत,अकल्पनीय
खुशियों की अनुभूति होती है
सुंदर-सुंदर बाली पहन जब
धरती मां हमारी मुस्काती हैं
सूने सूने मन के आंगन में
जुगनू चमक जाते हैं
मां की ममता जब मां के
गोद में शरण पाती है
संवेदनशील आंचल
ओढ़ खूब इठलाती है
संवेदना भरी हाथ जब
अपने सर पर पाती है
क्या बताऊं कितना
सहस्त्र जन्म तर जाती है
हंसती मां के गोद में
खेलती मां के गोद में
खुद को भी भूल जाती
मां के आमोद प्रमोद में
धरती मां धड़कन बन
दिल को जब धड़काती हैं
निष्प्राण में जैसे प्राण
सी आ जाती है
धूमिल ना होने देती चेहरों को
चाहतों से चमकाती हैं
संपूर्ण अपना प्यार लुटा कर
धन्य धन्य कर जाती हैं।।
-ममता तिवारी
5 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10257 कविताएं

View Profile