हरी जड़ी बूटीदार लहंगा पहन
जब धरती मां हमारी सजती हैं
दिल को अद्भुत,अकल्पनीय
खुशियों की अनुभूति होती है
सुंदर-सुंदर बाली पहन जब
धरती मां हमारी मुस्काती हैं
सूने सूने मन के आंगन में
जुगनू चमक जाते हैं
मां की ममता जब मां के
गोद में शरण पाती है
संवेदनशील आंचल
ओढ़ खूब इठलाती है
संवेदना भरी हाथ जब
अपने सर पर पाती है
क्या बताऊं कितना
सहस्त्र जन्म तर जाती है
हंसती मां के गोद में
खेलती मां के गोद में
खुद को भी भूल जाती
मां के आमोद प्रमोद में
धरती मां धड़कन बन
दिल को जब धड़काती हैं
निष्प्राण में जैसे प्राण
सी आ जाती है
धूमिल ना होने देती चेहरों को
चाहतों से चमकाती हैं
संपूर्ण अपना प्यार लुटा कर
धन्य धन्य कर जाती हैं।।
-ममता तिवारी
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