उन्नति की राहों में कठिनाइयों के कांटे बिछे होंगे
वे मंजिल तक कहां पहुंचे होंगे
जिन्होंने अपने पांव पीछे खींचे होंगे
माना राहे आसान नहीं
लेकिन यहां कौन है जो परेशान नहीं
परेशानियों के आगे ही तो मंजिल दिखे होंगे
हौसलों के आगे मुश्किलों की औकात कहां
जो मुश्किल से टूट जाए वह इंसान कहां
राहों के शूल को फूल बनाने होंगे
हिम्मत और हौसलों से आगे बढने होंगे
मंजिल दूर नहीं खुद को विश्वास दिलाने होंगे
हां,हमें हार नहीं स्वीकारने होंगे
चुनौतियों को चमत्कार में बदलने होंगे
एक बार जोरदार प्रयास करने होंगे
मंजिलों को हमारी बेसब्री से इंतज़ार होंगे
राहों के अंधेरों से हमें दीपक की तरह लड़ने होंगे
हमें अपने जीवन में खुद ही उजाले भरने होंगे
लाख कठिनाइयां हो परवाह नहीं करने होंगे
हमें जी जान लगाकर कोशिश करने होंगे।।
-ममता तिवारी