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प्रेम ममता त्याग समर्पण

jayshri Jondhale

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रेम ममता त्याग समर्पण
        
                                                    
                            
लेकर जो जन्मी हैं
रूडी परंपरा से दबकर
हर बार नारी छली है
बंदी रही कितने बंधनों में
घुटती रही है घरों में
कीमत उसकी शुन्य करके भी
वह सदा अनमोल रही है
उड़ रही है आसमानों में फिर भी
ममता की दौर से बंदी हुई है
चलती रहती है साथ फेरों में
घुटन भरी आज भी जी रही है
5 महीने पहले
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