गुज़र गया वो बचपन,
हसते-खेलते,
रोते-झगड़ते,
होती रहती थी अनबन,
गुज़र गया वो बचपन |
हुए बड़े और दूरीयां बढ़ीं,
Freedom बढ़ा पर हो गए busy,
हसना तो दूर, अब तो लड़ने का भी time नहीं,
अब समझा क्यों कभी - कभी लगता नहीं मन,
क्योंकि गुजर गया वो बचपन |
रात देर हुई पर हम आए,
दीदी के यहां, और कहां?
सुबह जल्दी उठे और मिली चाय,
ठंडी हवा लगी और हम पहुंच गए वहाँ,
जहां हैं स्कूल, टीचर और दोस्त,
वो यादों का जहां,
फिर gossip ताजा हुई, खूब gapiyaye,
पापा की खींचातानी हुई,
और टीचर की नकल भी करवाये,
लगा पहुंच गए पुराने घर के आंगन,
क्या सच में गुजर गया वो बचपन?
बढ़ रहे हैं अब mid-life की तरफ,
और क्या पता शायद crisis की तरफ?
पर आज लगा उमर घट गई है,
इन लम्हों की तो मुझे लत लग गई है,
लौट आया जो रक्षा बंधन,
पता चला गुज़रा नहीं है वो बचपन |