आज का युवा जो बड़ा अकेला है,
अकेला है क्योंकि उसकी चिंताओं में उसके कोई साथ नहीं।
चिंता भविष्य की, चिंता घर की ,चिंता उस प्रेमिका
की जिस से वो इश्क करता है।
कि कहीं उसे कोई और ना ले जाए
वो युवा चिंता से भागता है कभी नशा
की तरफ तो कभी वासना की तरफ,
पर ना नशा ना वासना उसकी चिंता
मिटा सके। बस वो पल है उनमें जो उसे
चिंता से कुछ समय के लिए दूर करते हैं।
पर जैसे ही नशा या वासना पूरी
होती ,चिंता का विचारों में एक सैलाब
उमड़ता है। सैलाब उसे याद दिलाता है
कि कुछ नहीं बदला। पर फिर भी उन
तरफ भागता, क्योंकि कुछ समय के लिए चिंता
की दूरी सुकून देती है।
फिर कभी भविष्य मे डुबा मिलता है वो,
भविष्य की चिंताएँ उसे रोज मारती है, लेकिन
सोचने की बात है जो भविष्य उसने दैखा नहीं।
उसका इतना डर , कैसे ?
सायद वो डर किसी ने उनमें डाला है?
डालने वाला स्वयं उसका कोई अपना है।
घर वाला उसे कुछ कहते नहीं, पर फिर
भी वो समझ ही लेता है। वो युवा कभी
भागता नहीं जिम्मेदारियों से, जो
युवा सच मे बड़ा अकेला है।