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इन्तजार

BHARAT YADAV

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसकी तरह चाहने वाला हमने कभी नहीं देखा
        
                                                    
                            
दिल मे था दगा उसके कितना हमने कभी नहीं देखा

यहां पर मोहब्बत मजबूरी
मौत का दृष्टांत सबने देखा
किसी भी ने हमारे जख्म
जिगर का वृत्तांत ना देखा

हमने समझा था वो कभी
समझेगा मेरे मन का मंतव्य
पता ना था हमें आखिरी पल
में बदल लेगा वो अपना गंतव्य

रास्ता कटता नहीं अंत मिलता नहीं मेरी खमोश मंजिल का
आंखें खुली है सांसे थमी है कोई खबर नहीं मेरे संगदिल का

अब सैलाब आये या तूफ़ा या
आग लग जाये इस जंगल को

इन्तजार यही खत्म होगा सौप दिया
जिन्दगी ख्वाबों के इस दंगल को

भरत यादव  


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