उसकी तरह चाहने वाला हमने कभी नहीं देखा
दिल मे था दगा उसके कितना हमने कभी नहीं देखा
यहां पर मोहब्बत मजबूरी
मौत का दृष्टांत सबने देखा
किसी भी ने हमारे जख्म
जिगर का वृत्तांत ना देखा
हमने समझा था वो कभी
समझेगा मेरे मन का मंतव्य
पता ना था हमें आखिरी पल
में बदल लेगा वो अपना गंतव्य
रास्ता कटता नहीं अंत मिलता नहीं मेरी खमोश मंजिल का
आंखें खुली है सांसे थमी है कोई खबर नहीं मेरे संगदिल का
अब सैलाब आये या तूफ़ा या
आग लग जाये इस जंगल को
इन्तजार यही खत्म होगा सौप दिया
जिन्दगी ख्वाबों के इस दंगल को
भरत यादव
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