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आजादी के दीवाने

माधव झा

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देकर बलिदान जो अपना
        
                                                    
                            
दे गए हैं हमको
आजादी की निशानी
कर याद जिसे नयनों
से गिरते हैं पानी
आजादी के उन दीवानों की
बहुत बड़ी है दास्तां
सहस्त्र मुखों से शेष भी
ना कर सकते हैं बयां
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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