देकर बलिदान जो अपना
दे गए हैं हमको
आजादी की निशानी
कर याद जिसे नयनों
से गिरते हैं पानी
आजादी के उन दीवानों की
बहुत बड़ी है दास्तां
सहस्त्र मुखों से शेष भी
ना कर सकते हैं बयां
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