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आजादी के दीवाने

                
                                                         
                            देकर बलिदान जो अपना
                                                                 
                            
दे गए हैं हमको
आजादी की निशानी
कर याद जिसे नयनों
से गिरते हैं पानी
आजादी के उन दीवानों की
बहुत बड़ी है दास्तां
सहस्त्र मुखों से शेष भी
ना कर सकते हैं बयां
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले

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