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कच्चे सूत का धागा भर नहीं,

Anita Chaturvedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कच्चे सूत का धागा भर नहीं,
        
                                                    
                            
इसमें स्नेह समाया है,
बहन की कोमल उँगली ने
भाई को आज सजाया है।

रेशम से भी कोमल बंधन,
मन से मन तक जाता है,
दूर रहें चाहे भाई-बहन,
रिश्ता पास बुलाता है।

नहीं माँगता धन-दौलत यह,
नहीं चाहता उपहार,
बस जीवन भर साथ निभाना—
इतना ही है अधिकार।

सुख में हँसना, दुख में लड़ना,
हर पल साथ निभाना है,
रक्षा केवल कलाई की नहीं,
विश्वास भी बचाना है।

यह पावन-सा रक्षासूत्र
रिश्तों को दृढ़ बनाता है,
प्रेम भरा इसका हर बंधन
सदियों तक याद दिलाता है।

जहाँ प्रेम हो, विश्वास हो,
वहीं सच्ची राखी है,
भाई-बहन के पावन रिश्ते की
यही अमिट निशानी है।
- अनिता चतुर्वेदी 'मनस्वरा'
10 घंटे पहले
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