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हमारी शहर में यूं किरकिरी नहीं होती

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारी शहर में यूं किरकिरी नहीं होती
        
                                                    
                            
किसी अपने की अगर मुखबिरी नहीं होती
शरीफ आदमी बेशक ही हम हुआ करते
हमारे साथ अगर दिल्लगी नहीं होती
तब्दीली आ रही है मगर रफ़्ता रफ़्ता
कोई कायापलट एकबारगी नहीं होती
खराब सी जरा मुझको भी लगती है दुनिया
ये होती जन्नत ,जरा जो मतलबी नहीं होती
मैं उसपे अपना दिलो जान निसार कर देता
वो जो पहचान कर भी अजनबी नहीं होती
नवाजिशें जो तेरे नजरों की इस घर होती
कोई दीवार स्याह, खुरदुरी नहीं होती
मंजिलें जिनको मिली उनको भी देखा हमने
कोई मंजिल कभी भी आखिरी नहीं होती
3 घंटे पहले
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