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आशिक की आँखों

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हसीन वादियों को लेकर कोई चला है,
        
                                                    
                            
ना जाने कहाँ जाकर बैठा है...

हर एक ख़्वाहिश को मानो वो महज़ एक पर्दा समझता है,
उस नक़ाब के नीचे क्या छुपा है... वो खुदा जाने!

पर हम... हम तो मजबूर होकर आगे हार जाते हैं,
उनकी इस बेरुखी सी ख़्वाहिश के आगे,
ये धुंधला सा मंज़र हम तो नहीं पहचान पाते...

तेरी आशिक की आँखों का!
एक महीने पहले
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