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‘ख़याल’ पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

हरि कर्की

Kavya Charcha
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                                                  ख़याल जिस का था मुझे ख़याल में मिला मुझे
सवाल का जवाब भी सवाल में मिला मुझे

- मुनीर नियाज़ी


तिरे ख़याल में मैं हूँ मिरे ख़याल में तू
मिरे बग़ैर तिरी दास्ताँ रहे न रहे

- अबु मोहम्मद वासिल बहराईची
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मिरा ख़याल तिरी चुप्पियों को आता है
तिरा ख़याल मिरी हिचकियों को आता है

- कुमार विश्वास



ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें
साक़िया साक़िया सँभाल हमें

- अहमद फ़राज़

ये ख़याल था कभी ख़्वाब में तुझे देखते
कभी ज़िंदगी की किताब में तुझे देखते

- तारिक़ नईम



देखा हिलाल-ए-ईद तो आया तेरा ख़याल
वो आसमाँ का चाँद है तू मेरा चाँद है

- अज्ञात

दिल को आने लगा बसने का ख़याल
आग जब घर को लगा दी हम ने

- बाक़ी सिद्दीक़ी


इसी ख़याल से पलकों पे रुक गए आँसू
तिरी निगाह को शायद सुबूत-ए-ग़म न मिले

- वसीम बरेलवी

हर घड़ी तेरा तसव्वुर हर नफ़स तेरा ख़याल
इस तरह तो और भी तेरी कमी बढ़ जाएगी

- भारत भूषण पन्त


फ़िक्रों को चीरते हुए तेरे ख़याल ने
टूटे हुए बदन में नया दिल लगा दिया

- महमूद इश्क़ी

मिरा ख़याल नहीं है तो और क्या होगा
गुज़र गया तिरे माथे से जो शिकन की तरह

- कमाल अहमद सिद्दीक़ी


तेरे ख़याल के दीवार-ओ-दर बनाते हैं
हम अपने घर में भी तेरा ही घर बनाते हैं

- जमीलुद्दीन आली



साभार - रेख़्ता
5 वर्ष पहले
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