एक साल और बीत गया, इसके साथ ही नए साल की आमद भी हो चुकी है। किसी भी परंपरा में नए का स्वागत सदैव ज़ोर-शोर से ही किया जाता है। फिर ये तो पूरा साल है जिसके 12 महीने अपने आप में विशेष हैं इसलिए जश्न का होना लाज़मी भी है। विगत को भुलाकर इस नवागंतुक का स्वागत हमें पूरे जोश से करना चाहिए। ढेर सारी उम्मीद हों, आंख भर कर स्वप्न और मन में जज़्बा।
इसी जोश, उल्लास और उमंग पर शायरों ने भी अपने शेर कहे हैं।
ज़िंदगी सुंदर ग़ज़ल है दोस्तो
ज़िंदगी को गुनगुनाना चाहिए
- आज़िम कोहली
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हम बे-कार ही सहमे सहमे रहते हैं
जो होना होता है जब जब होता है
- फ़ारूक़ बख़्शी
बड़ा घाटे का सौदा है 'सदा' ये सांस लेना भी
बढ़े है उम्र ज्यूं-ज्यूं ज़िंदगी कम होती जाती है
- सदा अम्बालवी
मुश्किल का सामना हो तो हिम्मत न हारिए
हिम्मत है शर्त साहिब-ए-हिम्मत से क्या न हो
- इम्दाद इमाम असर
ये भी तो सोचिए कभी तन्हाई में ज़रा
दुनिया से हम ने क्या लिया दुनिया को क्या दिया
- हफ़ीज़ मेरठी
कोई इक ज़ाइक़ा नहीं मिलता
ग़म में शामिल ख़ुशी सी रहती है
- ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
फ़राग़त से दुनिया में हर दम न बैठो
अगर चाहते हो फ़राग़त ज़ियादा
- अल्ताफ़ हुसैन हाली
दुनिया में वही शख़्स है ताज़ीम के क़ाबिल
जिस शख़्स ने हालात का रुख़ मोड़ दिया हो
- अज्ञात
गो आबले हैं पांव में फिर भी ऐ रहरवो
मंज़िल की जुस्तुजू है तो जारी रहे सफ़र
- नूर क़ुरैशी
हो न मायूस ख़ुदा से 'बिस्मिल'
ये बुरे दिन भी गुज़र जाएंगे
- बिस्मिल अज़ीमाबादी