एक साल और बीत गया, इसके साथ ही नए साल की आमद भी हो चुकी है। किसी भी परंपरा में नए का स्वागत सदैव ज़ोर-शोर से ही किया जाता है। फिर ये तो पूरा साल है जिसके 12 महीने अपने आप में विशेष हैं इसलिए जश्न का होना लाज़मी भी है। विगत को भुलाकर इस नवागंतुक का स्वागत हमें पूरे जोश से करना चाहिए। ढेर सारी उम्मीद हों, आंख भर कर स्वप्न और मन में जज़्बा।
इसी जोश, उल्लास और उमंग पर शायरों ने भी अपने शेर कहे हैं।
ज़िंदगी सुंदर ग़ज़ल है दोस्तो
ज़िंदगी को गुनगुनाना चाहिए
- आज़िम कोहली
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X