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इरशाद

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पराजित नायक की दिनचर्या और उसकी सीख

काव्य डेस्क

Irshaad
                                                                
                                                    मिलने से बचता हूँ
सामने पड़ने पर कतराकर निकल जाता हूँ

मन नहीं करता किसी से बात करने का 
किसी की बातें सुनने का

लड़ने-झगड़ने का तो बिलकुल ही नहीं
हाँ भाई, आप ही ठीक हैं
अब यहाँ से विदा लें...और पढ़ें
1 year ago

'शरमाते हैं नहीं जगत् में जाति पूछने वाले' से दिनकर का जाति-प्रथा पर करारा प्रहार

दीपाली अग्रवाल

Irshaad
                                                                
                                                    फिरा कर्ण, त्यों 'साधु-साधु' कह उठे सकल नर-नारी,
राजवंश के नेताओं पर पड़ी विपद अति भारी।
द्रोण, भीष्म, अर्जुन, सब फीके, सब हो रहे उदास,
एक सुयोधन बढ़ा, बोलते हुए, 'वीर! शाबाश!'

द्वन्द्व-युद्ध के लिए...और पढ़ें
1 year ago
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सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा - प्रधानमंत्री मोदी अक्सर पढ़ते हैं यह कविता

काव्य डेस्क

Irshaad
                                                                
                                                    प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने भाषणों में देशभक्ति से भरपूर यह कविता पढ़ते हैं। इस गीत को प्रसून जोशी ने लिखा है।

सौगंध मुझे इस मिट्टी की,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।...और पढ़ें
2 years ago

अरुण कमल: सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार

काव्य डेस्क

Irshaad
                                                                
                                                    कौन बचा है जिसके आगे 
इन हाथों को नहीं पसारा 

यह अनाज जो बदल रक्त में 
टहल रहा है तन के कोने-कोने 
यह क़मीज़ जो ढाल बनी है 
बारिश सर्दी लू में 
सब उधार का, माँगा-चाहा 
नमक-तेल, हींग-हल्दी तक ...और पढ़ें
2 years ago
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एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो: हरिवंशराय बच्चन

रत्नेश मिश्र

Irshaad Kavita
                                                                
                                                    इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बँधाए,
कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,
इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,
और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गँवाए!
किंतु शहीदों की आहों से शापित...और पढ़ें
3 years ago

साहिर लुधियानवी की नज़्म: आओ कि आज ग़ौर करें इस सवाल पर 

काव्य डेस्क

Irshaad
                                                                
                                                    आओ कि आज ग़ौर करें इस सवाल पर 
देखे थे हम ने जो वो हसीं ख़्वाब क्या हुए 

दौलत बढ़ी तो मुल्क में अफ़्लास क्यूँ बढ़ा 
ख़ुश-हाली-ए-अवाम के अस्बाब क्या हुए 

जो अपने साथ साथ चले कू-ए-दार तक 
वो दोस्त वो र...और पढ़ें
3 years ago

सुभाष चन्द्र बोस : पढ़िए सुभाष चन्द्र बोस पर गोपाल प्रसाद व्यास द्वारा लिखी गयी दमदार कविता 'खूनी हस्ताक्षर'

काव्य डेस्क

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                                                    सुभाष चन्द्र बोस : पढ़िए सुभाष चन्द्र बोस पर गोपाल प्रसाद व्यास द्वारा लिखी गयी दमदार कविता 'खूनी हस्ताक्षर'

वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें उबाल का नाम नहीं।
वह खून कहो किस मतलब का
आ सके देश के काम नहीं।...और पढ़ें
3 years ago

जयंती विशेष-कुंवर नारायण: नचिकेता का पिता से संवाद और अपील  

काव्य डेस्क

Irshaad
                                                                
                                                    हिंदी के प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण का जन्म 19 सितंबर 1927 को फैजाबाद में हुआ जबकि निधन 15 नवंबर 2017 को लखनऊ में हुआ। उनकी जयंती पर उनकी नचिकेता कविता पढ़ें-   

असहमति को अवसर दो 
सहिष्णुता को आचरण दो 
कि बुद्धि सिर ऊंचा...और पढ़ें
4 years ago

गुलज़ार की मशहूर नज़्म: वक़्त को आते न जाते न गुज़रते देखा 

रत्नेश मिश्र

Irshaad
                                                                
                                                    वक़्त को आते न जाते न गुज़रते देखा 
न उतरते हुए देखा कभी इल्हाम की सूरत 
जमा होते हुए इक जगह मगर देखा है 

शायद आया था वो ख़्वाबों से दबे पाँव ही 
और जब आया ख़यालों को भी एहसास न था 
आँख का रंग तुलु होते हुए...और पढ़ें
4 years ago

तितलियों के ब्याह नहीं होते : लीलाधर जगूड़ी 

काव्य डेस्क

Kavita Irshaad
                                                                
                                                    ऐसे ही किसी क्षण उड़ते हुए भूतपूर्व फूल आये 
और कहने लगे हम तितलियां हैं 
तब से बाग-बगीचे ढूंढ़ रहा हूं 
आत्मा में तितलियों की एक पूरी पाठशाला लिये हुए

एक ओर से आती है मेरी पांच वर्ष की बेटी 
दूसरी ओर से चेच...और पढ़ें
4 years ago
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