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दल-बदलू

इरशाद

पराजित नायक की दिनचर्या और उसकी सीख

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मिलने से बचता हूँ
सामने पड़ने पर कतराकर निकल जाता हूँ

मन नहीं करता किसी से बात करने का 
किसी की बातें सुनने का

लड़ने-झगड़ने का तो बिलकुल ही नहीं
हाँ भाई, आप ही ठीक हैं
अब यहाँ से विदा लें
या मैं ही चला जाता हूँ आगे पढ़ें

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