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कविता

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मंगलेश डबराल की कविता- मैं एक लापता लड़के का ब्योरा देना चाहता था

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    कई बार मैंने कोशिश की
इस बाढ़ में से अपना एक हाथ निकालने की
कई बार भरोसा हुआ
कई बार दिखा यह है अंत

मैं कहना चाहता था
एक या दो मालूमी शब्द
जिन पर फ़िलहाल विश्वास किया जा सके
जो सबसे ज़रूरी हों फ...और पढ़ें
5 hours ago

अक्षय उपाध्याय की कविता- सीने में क्या है तुम्हारे

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    कितने सूरज हैं तुम्हारे सीने में
कितनी नदियाँ हैं
कितने झरने हैं

कितने पहाड़ हैं तुम्हारी देह में
कितनी गुफ़ाएँ हैं

कितने वृक्ष हैं
कितने फल हैं तुम्हारी गोद में

कितने पत्ते हैं...और पढ़ें
1 day ago
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Hasya: काका हाथरसी की हास्य-व्यंग्य से भरपूर तीन चुनिंदा कविताएं

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    1- 

भोंदूमल बेकार थे, हुआ पिलपिला हाल।
फ़ाक़े होने लगे तब, पहुँच गए ससुराल॥
पहुँच गए ससुराल, बीस दिन करो चराई।
पाँच किलो बढ़ गया वज़न, आई चिकनाई॥
घर आए तो देखा, छह मेहमान डट रहे।
उनके दर्शन करते ही, छ...और पढ़ें
2 days ago

श्रीकांत वर्मा की कविता- कुछ का व्यवहार बदल गया, कुछ का नहीं बदला

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    कुछ का व्यवहार बदल गया। कुछ का नहीं
बदला।
जिनसे उम्मीद थी, नहीं बदलेगा
उनका बदल गया।
जिनसे आशंका थी,
नहीं बदला।
जिन्हें कोयला मानता था
हीरों की तरह
चमक उठे।
जिन्हें हीरा मानता था
क...और पढ़ें
2 days ago
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सर्वेश्वरदयाल सक्सेना: अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता, सुनना चाहता हूँ

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    
अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता,
सुनना चाहता हूँ
एक समर्थ सच्ची आवाज़
यदि कहीं हो।

अन्यथा
इससे पूर्व कि
मेरा हर कथन
हर मंथन
हर अभिव्यक्ति
शून्य से टकराकर फिर वापस लौट आए,
...और पढ़ें
2 days ago

वीरेन डंगवाल की कविता- आएँगे, उजले दिन ज़रूर आएँगे

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    निराला को

आएँगे, उजले दिन ज़रूर आएँगे

आतंक सरीखी बिछी हुई हर ओर बर्फ़
है हवा कठिन, हड्डी-हड्डी को ठिठुराती
आकाश उगलता अंधकार फिर एक बार
संशय-विदीर्ण आत्मा राम की अकुलाती

होगा वह समर, अ...और पढ़ें
3 days ago

कान्हा त्रिपाठी की प्रेम कविता- स्वप्न नायिका

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    तुम दिखीं
मेरे जीवन के ऐसे अंतराल में,
जब मुट्ठी भर स्वप्न
सिमटे थे आँखों के उजले खयाल में।

हृदय के गलीचे पर
मधुवासंती की भीनी महक बनकर,
तुम उतरीं चुपके से
मन के सूने आँगन में बहककर।
...और पढ़ें
5 days ago

Hindi Poetry: भगवत रावत की कविता- सोच रही है गंगाबाई

काव्य डेस्क

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                                                    सिर्फ एक ही बेटा है गंगाबाई का
छोड़ गया था बाप ज़रा सा उसे गोद में
कैसे काटी फूँक-फूँक बच-बचाकर
अपनी कठिन उमर गंगाबाई ने
वही जानती

बरतन-झाड़ू-पोंछा करके
किसी तरह बेटे का दसवाँ पास कराया
पर जब स...और पढ़ें
1 week ago

रामधारी सिंह 'दिनकर': लिख रहे गीत इस अंधकार में भी तुम

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    लिख रहे गीत इस अंधकार में भी तुम
रवि से काले बरछे जब बरस रहे हैं,
सरिताएँ जम कर बर्फ हुई जाती हैं,
जब बहुत लोग पानी को तरस रहे हैं?

इन गीतों से यह तिमिर-जाल टूटेगा?
यह जमी हुई सरिता फिर धार धरेगी?
बरस...और पढ़ें
1 week ago

कन्हैया लाल सेठिया की कविता- फूल झरेगा, शूल रहेगा, सत्य कौन है

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    फूल विहँसता, शूल मौन है ।
एक डाल के दोनों साथी
दोनों को ही हवा झुलाती
फूल झरेगा, शूल रहेगा, सत्य कौन है, भूल कौन है ?

लहर नाचता, कूल मौन है ।
एक पन्थ के दोनों साथी
दोनों को किरणें नहलाती
लहर मि...और पढ़ें
1 week ago
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