कई बार मैंने कोशिश की
इस बाढ़ में से अपना एक हाथ निकालने की
कई बार भरोसा हुआ
कई बार दिखा यह है अंत
मैं कहना चाहता था
एक या दो मालूमी शब्द
जिन पर फ़िलहाल विश्वास किया जा सके
जो सबसे ज़रूरी हों फ...और पढ़ें
कितने सूरज हैं तुम्हारे सीने में
कितनी नदियाँ हैं
कितने झरने हैं
कितने पहाड़ हैं तुम्हारी देह में
कितनी गुफ़ाएँ हैं
कितने वृक्ष हैं
कितने फल हैं तुम्हारी गोद में
कितने पत्ते हैं...और पढ़ें
1-
भोंदूमल बेकार थे, हुआ पिलपिला हाल।
फ़ाक़े होने लगे तब, पहुँच गए ससुराल॥
पहुँच गए ससुराल, बीस दिन करो चराई।
पाँच किलो बढ़ गया वज़न, आई चिकनाई॥
घर आए तो देखा, छह मेहमान डट रहे।
उनके दर्शन करते ही, छ...और पढ़ें
कुछ का व्यवहार बदल गया। कुछ का नहीं
बदला।
जिनसे उम्मीद थी, नहीं बदलेगा
उनका बदल गया।
जिनसे आशंका थी,
नहीं बदला।
जिन्हें कोयला मानता था
हीरों की तरह
चमक उठे।
जिन्हें हीरा मानता था
क...और पढ़ें
अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता,
सुनना चाहता हूँ
एक समर्थ सच्ची आवाज़
यदि कहीं हो।
अन्यथा
इससे पूर्व कि
मेरा हर कथन
हर मंथन
हर अभिव्यक्ति
शून्य से टकराकर फिर वापस लौट आए,
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निराला को
आएँगे, उजले दिन ज़रूर आएँगे
आतंक सरीखी बिछी हुई हर ओर बर्फ़
है हवा कठिन, हड्डी-हड्डी को ठिठुराती
आकाश उगलता अंधकार फिर एक बार
संशय-विदीर्ण आत्मा राम की अकुलाती
होगा वह समर, अ...और पढ़ें
तुम दिखीं
मेरे जीवन के ऐसे अंतराल में,
जब मुट्ठी भर स्वप्न
सिमटे थे आँखों के उजले खयाल में।
हृदय के गलीचे पर
मधुवासंती की भीनी महक बनकर,
तुम उतरीं चुपके से
मन के सूने आँगन में बहककर।
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सिर्फ एक ही बेटा है गंगाबाई का
छोड़ गया था बाप ज़रा सा उसे गोद में
कैसे काटी फूँक-फूँक बच-बचाकर
अपनी कठिन उमर गंगाबाई ने
वही जानती
बरतन-झाड़ू-पोंछा करके
किसी तरह बेटे का दसवाँ पास कराया
पर जब स...और पढ़ें
लिख रहे गीत इस अंधकार में भी तुम
रवि से काले बरछे जब बरस रहे हैं,
सरिताएँ जम कर बर्फ हुई जाती हैं,
जब बहुत लोग पानी को तरस रहे हैं?
इन गीतों से यह तिमिर-जाल टूटेगा?
यह जमी हुई सरिता फिर धार धरेगी?
बरस...और पढ़ें
फूल विहँसता, शूल मौन है ।
एक डाल के दोनों साथी
दोनों को ही हवा झुलाती
फूल झरेगा, शूल रहेगा, सत्य कौन है, भूल कौन है ?
लहर नाचता, कूल मौन है ।
एक पन्थ के दोनों साथी
दोनों को किरणें नहलाती
लहर मि...और पढ़ें