फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Agriculture ›   bill gates to inaugurate first agriculture statistic meet on 18 november in india

बिल गेट्स करेंगे कृषि सांख्यिकी सम्मेलन का उद्घाटन, विश्लेषण का बदलेगा तरीका

Sat, 16 Nov 2019 01:14 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 16 Nov 2019 01:14 PM IST
विज्ञापन
bill gates to inaugurate first agriculture statistic meet on 18 november in india

भारत में भी कृषि सांख्यिकी के तहत आंकड़ों के संकलन और इसके विश्लेषण का तरीका बदलेगा। इसके लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से भारत में पहली बार कृषि सांख्यिकी पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। 18 से 21 नवंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और समाजसेवी बिल गेट्स करेंगे।

विज्ञापन


कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) सचिव त्रिलोचन महापात्र ने शुक्रवार को बताया कि अभी तक यहां कृषि सांख्यिकी से जुड़े आंकड़े एनएसएसओ जुटाता है। इसका संकलन और विश्लेषण पारंपरिक तरीके से होता है। अब अंतरराष्ट्रीय मानक और तरीके से इसका संकलन होगा। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन, अमेरिका का कृषि विभाग, आईएसआईकास, यूरोस्टैट, भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कृषि सांख्यिकी के संग्रहण और विश्लेषण पर कई सत्रों का आयोजन होगा। इसमें दुनियाभर के करीब 1,200 प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।

विज्ञापन

भुखमरी-कुपोषण से लड़ने में मदद

त्रिलोचन महापात्र ने बताया कि इस सम्मेलन में इटली स्थित एफएओ के मुख्य सांख्यिकीविद पिएत्रो जेनारी, यूरोपीय संघ के सांख्यिकी कार्यालय यूरोस्टैट की महानिदेशक मारियाना कोटजेवा और भारत के नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद मुख्य वक्ता होंगे। इसमें एफएओ, यूएसडीए, यूरोस्टैट, एडीबी, एएफडीबी, विश्व बैंक और 60 से भी अधिक देशों के लगभग 200 अंतरराट्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। आधुनिक तरीके से कृषि सांख्यिकी का संकलन और विश्लेषण करने से भुखमरी और कुपोषण से लड़ने में भी मदद मिलेगी। इन आंकड़ों की मदद से जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी समस्या से भी निपटा जा सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed