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चौकी पुलिस ने मरवा दिया हमारी बच्चियों को

Thu, 29 May 2014 05:36 AM IST
Badaun
Badaun Updated Thu, 29 May 2014 05:36 AM IST
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उसहैत। दो किशोरियों की सामूहिक दुराचार के बाद हत्या कर शव पेड़ से लटकाए जाने की घटना से इलाके के लोगों में जबर्दस्त गुस्सा है। स्थानीय पुलिस की कारस्तानी से उपजे इस गुस्से को अफसरों को झेलना पड़ा।
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बता दें कि सुबह चार बजे ही बालिकाओं के परिवार वाले गांव से करीब दो सौ मीटर दूर स्थित आम के बाग में पहुंच चुके थे, जहां दोनों लड़कियों के शव लटके हुए थे। शव देखकर घरवालों की रुलाई फूट गई। वह चीख-चीखकर गांव के ही दबंगों पर ज्यादती का आरोप लगा रहे थे। थोड़ी ही देर में लगभग पूरे गांव के लोग बाग में आ गए। गांव का बाजार भी बंद हो गया। सभी ने हकीकत जानने के बाद आरोपियों को कोसा। इस बीच पुलिस को सूचना दी गई। चूंकि चौकी पुलिस तो इस मामले में खुद आरोपियों की हिमायत कर रही थी इसलिए थाना पुलिस ने ही आकर लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। शव उतारने की कोशिश की तो लोगों ने पुलिस को खदेड़ दिया। इसके बाद एसओ ने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। तब आसपास के थानों की पुलिस भी मौके पर भेज दी गई। हालांकि घरवाले आईजी या डीआईजी के मौके पर आए बिना किसी कीमत पर शव उतारने के लिए तैयार नहीं थे।
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सुबह प्रभारी एसएसपी मानसिंह चौहान, सीओ उझानी मुकेश सक्सेना महिला पुलिस और पीएसी समेत घटनास्थल पर पहुंच गए। थोड़ी देर बाद प्रभारी डीएम उदयराज सिंह और एसडीएम दातागंज भी पहुंच गए। विस्फोटक हालात की जानकारी आईजी और डीआईजी को भी दी गई। तब डीआईजी के निर्देश पर शाहजहांपुर जिले के परौर, मिर्जापुर, कलान और जलालाबाद थानों के प्रभारी भी फोर्स लेकर इधर आ गए। जलालाबाद सर्किल के सीओ भी यहां आ गए। बरेली से भी कुछ फोर्स आ गई। अधिकारियों ने कई दौर में पीड़ित पक्ष से वार्ता की पर वह कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। बाद में सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज करके पूरी चौकी को निलंबित करने की मांग की गई। सिपाही सर्वेश यादव को निलंबित करने की घोषणा एसपी सिटी ने कर दी फिर भी भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। दोपहर बाद अधिकारियों ने तहरीर के मुताबिक रिपोर्ट लिखने और दोषी स्टाफ पर कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया तो भीड़ शांत हुई। शाम करीब साढ़े चार बजे शव उतारे जा सके। इस दौरान अफसरों ने तमाम तरह का विरोध झेला। भीड़ ने उन पर एक जाति विशेष के स्टाफ को थाने-चौकियों का चार्ज देकर क्राइम बढ़वाने के तंज कसे। कहा, गरीब की कहीं पर सुनवाई नहीं हो रही।
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सिपाही ने कहा था, देख लो पेड़ पर तो नहीं लटकीं हैं लड़कियां
क्रासर
रात भर दहशत के साये में रहा पीड़ित परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
उसहैत। बालिकाओं का परिवार मंगलवार रात भर दहशत के साये में रहा। पहले दबंग उनके सामने उनकी बेटियों को ले गए तो बाद में सिपाहियों ने उन्हें पीटकर भगा दिया।
बता दें कि रात में जब शौच को गई बालिकाएं नहीं लौटीं तो उनके घरवाले अलग-अलग दिशाओं में उन्हें खोजने निकले। इस बीच बालिकाओं के चाचा को एक जगह दोनों लड़कियां दिख गईं। उस वक्त वह आरोपी युवकों के कब्जे में थीं। चाचा ने इनमें से एक युवक को पकड़ लिया तो उसके भाई ने तमंचे से हवाई फायर कर दिया। इसके बाद चाचा डर गया और आरोपी जबरन लड़कियों को साथ लेकर भाग निकले।
यह बात उन्होंने घर आकर बताई। तब घरवाले पुलिस चौकी पहुंचे। वहां से सिपाही सर्वेश यादव ने उन्हें यह कहकर भेज दिया कि पहले तुम लोग खोज लो, फिर हम देखेंगे। परिवार वाले फिर लड़कियों को खोजने लगे पर सुराग न मिलने पर दोबारा चौकी पहुंच गए। इस बार सिपाही सर्वेश और छत्रपाल ने घरवालों के साथ मारपीट की। गालियां देकर उन्हें भगा दिया।
घरवालों के मुताबिक, सिपाहियों ने कहा-देख लो किसी पेड़ पर तो नहीं लटकी हैं तुम्हारी लड़कियां। तब घरवाले बेबस होकर लौट आए। सुबह जब उन्हें लड़कियां बाग में पेड़ से लटकी मिलीं तो उन्हें सर्वेश की बातें याद आने लगीं। चूंकि आरोपी पक्ष से सिपाही सर्वेश की रिश्तेदारी भी है इसलिए उन लोगों ने सोच लिया कि इस घटना में गहरी साजिश की गई है, जिसमें चौकी स्टाफ भी शामिल है।

पूरी चौकी यादव बिरादरी के हवाले
निगरानी के अभाव में हो गए थे निरंकुश
बदायूं। कटरा सआदतगंज पुलिस चौकी स्टाफ के खिलाफ घटना के बाद जनाक्रोश अनायास ही नहीं भड़का। यह पुलिसकर्मियों की सतत निरंकुशता का परिणाम था। चौकी पर मुख्य रूप से एक ही बिरादरी का स्टाफ तैनात था। जिला मुख्यालय से दूर इस चौकी का अधिकारी गाहे-बगाहे भी निरीक्षण नहीं करते थे। इससे स्टाफ को और आजादी मिली।
घटना के बाद चौकी पुलिस के खिलाफ पब्लिक की नाराजगी की बड़ी वजह भी यही थी। गांव में मुख्य रूप से दो बिरादरी का वर्चस्व रहा है। इनमें मौर्य लोगों की संख्या ज्यादा है, जबकि कम संख्या के बावजूद यादव बिरादरी के लोग यहां ज्यादा प्रभावशाली हैं। बता दें कि इस चौकी के प्रभारी रामविलास यादव और तीनों सिपाही सर्वेश, रघुनंदन और सत्येंद्र भी यादव ही हैं। केवल हेड कांस्टेबल छत्रपाल गंगवार ही कुर्मी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। भीड़ का आरोप था कि सिपाहियों की गांव में रिश्तेदारी हैं। कहा, इन्हीं सिपाहियों के दम पर दूसरे पक्ष ने गांव में आतंक कायम कर रखा है।

सिनोद के आने पर ही उतारे गए शव
शाहजहांपुर के जनप्रतिनिधि भी पहुंचे
उसहैत। क्षेत्र में वारदात के बाद तमाम राजनेता मौके पर पहुंचे और पीड़ित पक्ष को सांत्वना दी। इन लोगों ने भीड़ को शांत करवाने में पुलिस की मदद भी की। भीड़ बार-बार पुलिस पर भड़क रही थी तो नेताओं ने उसे संयत करने की कोशिश की। जलालाबाद के बसपा विधायक नीरज मौर्य ने मौके पर आकर लोगों को समझाया। मौर्य समाज के प्रभावशाली नेता भगवान सिंह शाक्य और कांग्रेस नेता ब्रजपाल शाक्य भी पहुंचे और लोगों को समझाकर शव उतरवाने को कहा। हालांकि भीड़ कुछ सुनने को तैयार नहीं थी। इसी बीच क्षेत्रीय विधायक सिनोद शाक्य मौके पर पहुंचे। इससे पहले उनके भाई पूर्व प्रमुख लोगों को समझा रहे थे पर भीड़ नहीं मानी। सिनोद ने प्रभारी डीएम और एसएसपी से बात कर थाने से जीडी मौके पर मंगवाई। फिर पीड़ित पक्ष की तहरीर के मुताबिक रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें प्रति सौंप दी गई। विधायक पीड़ित पक्ष के साथ पोस्टमार्टम हाउस भी आए। यहां दातागंज चेयरमैन राजीव गुप्ता और उसहैत चेयरमैन गोल्डी गुप्ता ने भी पीड़ित पक्ष को सांत्वना दी।

महिलाओं पर बढ़े अत्याचार: सुनीता
उसहैत। विधायक सिनोद शाक्य की पत्नी और आंवला सीट से बसपा प्रत्याशी रहीं सुनीता शाक्य ने सपा सरकार को क्राइम कंट्रोल के मामले में पूरी तरह विफल बताया। उन्होंने कहा कि इस सरकार में महिलाओं पर अत्याचार काफी बढ़ गए हैं। इसके खिलाफ बसपा अभियान चलाएगी। विधायक सिनोद ने कहा कि उन्होंने लखनऊ में उच्चाधिकारियों से बात की है। इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जन आंदोलन चेड़ा जाएगा।


पॉक्सो एक्ट लगा, एसओ भी लपेटे में
उसहैत। पीड़ित पक्ष की ओर से पप्पू यादव समेत सात आरोपियों के खिलाफ धारा 302, 376, 120 बी, और पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें पांच लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का आरोप है तो सिपाहियों पर साजिश में शामिल होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। एसओ उसहैत गंगा सिंह यादव पर भी जानकारी के बावजूद कार्रवाई न करने की तोहमत लगाई गई है। इस लिहाज से कहीं न कहीं वह भी कसूरवार हैं। इस मुकदमे में पुलिस ने निष्पक्षता से विवेचना की तो दोषियों को फांसी तक की सजा हो सकती है।
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