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दो पूर्व मंत्रियों की लाज पत्नियों ने बचाई
Badaun
Updated Sun, 08 Jul 2012 12:00 PM IST
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सुशील कुमार
बदायूं। दो पूर्वमंत्रियों को भले ही विधानसभा चुनाव में सफलता हाथ न लगी हो, लेकिन पत्नियों ने निकाय चुनाव में परचम फहराकर उनकी लाज बचाई है। इस चुनाव में जीत के लिए मंत्रियों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इसका प्रतिफल ये हुआ की पत्नियां जीत गईं और फिर से मंत्रियों के चेहरों की रौनक लौट आई।
मार्च माह में हुए चुनाव में बिल्सी विधानसभा से सपा प्रत्याशी विमल कृष्ण अग्रवाल को 48,241 वोट मिले थे। इन्हें बसपा प्रत्याशी हाजी बिट्टन ने 9,336 मतों से हराया था। इससे पहले वर्ष 2002 में सपा की सरकार बनी थी। उस दौरान श्री अग्रवाल को मंत्री पद मिला था। श्री अग्रवाल ने निकाय चुनाव में उझानी नगरपालिका के अध्यक्ष पद से अपनी पत्नी पूनम अग्रवाल को फिर से चुनाव मैदान में उतारा। जी तोड़ मेहनत की और पत्नी दोबारा अध्यक्ष चुनी गईं। उन्होंने रानी सवा को हराकर 11,586 मत पाए। रानी सवा को 5449 मत मिले।
बसपा शासनकाल में मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह दद्दा ने महान दल के टिकट से विधानसभा में ताल ठोंकी थी, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई थी। उसके बाद तो उनकी नजर निकाय चुनाव पर टिक गई। वह किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार थे और पत्नी शशि राठौर को नगर पंचायत गुलड़िया से अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी बना दिया। कड़ी मेहनत के बाद शुक्रवार को मतगणना के दौरान पत्नी की जीत पर दद्दा के चेहरे पर खुशी आ गई। उनकी पत्नी शशि राठौर 1569 वोट पाकर विजेता घोषित हुई। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी शरद कुमार को 51 वोटों से हराया। इस तरह दोनों पूर्वमंत्रियों की पत्नियों ने परचम लहरा दिया और उनकी हार का बदला लिया।
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दो प्रतिनिधियों को मिली मात
शेखूपुर से पूर्व विधायक मुस्लिम खां इस बार विधानसभा चुनाव में हार गए थे। निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए ककराला नगरपालिका से अपनी पत्नी परवीन मुस्लिम को मैदान में उतारा था। इन्हें भी मात मिल गई। शहर विधायक की पत्नी फात्मा भी चुनाव हार गईं।
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बदायूं। दो पूर्वमंत्रियों को भले ही विधानसभा चुनाव में सफलता हाथ न लगी हो, लेकिन पत्नियों ने निकाय चुनाव में परचम फहराकर उनकी लाज बचाई है। इस चुनाव में जीत के लिए मंत्रियों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इसका प्रतिफल ये हुआ की पत्नियां जीत गईं और फिर से मंत्रियों के चेहरों की रौनक लौट आई।
मार्च माह में हुए चुनाव में बिल्सी विधानसभा से सपा प्रत्याशी विमल कृष्ण अग्रवाल को 48,241 वोट मिले थे। इन्हें बसपा प्रत्याशी हाजी बिट्टन ने 9,336 मतों से हराया था। इससे पहले वर्ष 2002 में सपा की सरकार बनी थी। उस दौरान श्री अग्रवाल को मंत्री पद मिला था। श्री अग्रवाल ने निकाय चुनाव में उझानी नगरपालिका के अध्यक्ष पद से अपनी पत्नी पूनम अग्रवाल को फिर से चुनाव मैदान में उतारा। जी तोड़ मेहनत की और पत्नी दोबारा अध्यक्ष चुनी गईं। उन्होंने रानी सवा को हराकर 11,586 मत पाए। रानी सवा को 5449 मत मिले।
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बसपा शासनकाल में मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह दद्दा ने महान दल के टिकट से विधानसभा में ताल ठोंकी थी, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई थी। उसके बाद तो उनकी नजर निकाय चुनाव पर टिक गई। वह किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार थे और पत्नी शशि राठौर को नगर पंचायत गुलड़िया से अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी बना दिया। कड़ी मेहनत के बाद शुक्रवार को मतगणना के दौरान पत्नी की जीत पर दद्दा के चेहरे पर खुशी आ गई। उनकी पत्नी शशि राठौर 1569 वोट पाकर विजेता घोषित हुई। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी शरद कुमार को 51 वोटों से हराया। इस तरह दोनों पूर्वमंत्रियों की पत्नियों ने परचम लहरा दिया और उनकी हार का बदला लिया।
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दो प्रतिनिधियों को मिली मात
शेखूपुर से पूर्व विधायक मुस्लिम खां इस बार विधानसभा चुनाव में हार गए थे। निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए ककराला नगरपालिका से अपनी पत्नी परवीन मुस्लिम को मैदान में उतारा था। इन्हें भी मात मिल गई। शहर विधायक की पत्नी फात्मा भी चुनाव हार गईं।