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12 साल में 4 जवानों ने गंवाई जान
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 21 Jul 2016 10:47 PM IST
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पकडि़हवा एसएसबी कैंप कार्यालय से शव ले जाते जवान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी द्वतीय वाहिनी की तैनाती के बाद अब तक चार जवानों की मौत हुई है। इसमें दो ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली तो दो की मौत संदिग्ध हाल में हुई दुर्घटना में बताई गई।नेपाल सीमा पर द्वितीय वाहिनी की तैनाती वर्ष 2004 में हुई थी। इससे पहले यह सीमा दसवीं वाहिनी के जिम्मे थी।
जिले को स्पर्श कर रही नेपाल की 68 किमी लंबी सीमा वर्ष 2002 में एसएसबी के हवाले हुई थी। नवंबर 2002 में यहां एसएसबी की दसवीं वाहिनी को तैनात किया गया था। यह वाहिनी करीब दो वर्ष तक यहां तैनात रही। वर्ष 2004 में यहां द्वितीय वाहिनी को तैनात किया गया।
तब से सीमा की कमान इन्हीं के हाथों में है।12 वर्षों में जिन चार जवानों की मौत हुई उसमें सबसे पहले वर्ष 04-05 में ककरहवा बार्डर के दुल्हा कोठी के पास मेजर (हेड कांस्टेबल) की संदिग्ध हाल में मौत हुई थी। इसके बाद वर्ष 05-06 में बजहां बीओपी पर उत्तराखंड के निवासी एक जवान की जान चली गई।
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एक कार्यक्रम के दौरान हुई इस घटना के वक्त एसएसबी और सिविल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बीओपी पर ही मौजूद रहे। घटना का कारण जवान की पैर फिसलकर मौत बताया गया था। तीसरी घटना 22 मई 2014 की है।
बजहां बीओपी पर तैनात बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी गांव निवासी रजनीश कुमार नामक कांस्टेबल ने अपनी सर्विस रायफल से गोली मारकर जान दे दी थी। गुरुवार को पकड़िहवा में एएसआई खूबराम की मौत चौथी घटना थी। गौरतलब बात यह है कि जवानों की मौत की घटनाएं फरमाने वाली बात है कि यह घटनाएं एसएसबी द्वितीय वाहिनी के अलीगढ़वा कंपनी के अंतर्गत ही हुई हैं।
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जिले को स्पर्श कर रही नेपाल की 68 किमी लंबी सीमा वर्ष 2002 में एसएसबी के हवाले हुई थी। नवंबर 2002 में यहां एसएसबी की दसवीं वाहिनी को तैनात किया गया था। यह वाहिनी करीब दो वर्ष तक यहां तैनात रही। वर्ष 2004 में यहां द्वितीय वाहिनी को तैनात किया गया।
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तब से सीमा की कमान इन्हीं के हाथों में है।12 वर्षों में जिन चार जवानों की मौत हुई उसमें सबसे पहले वर्ष 04-05 में ककरहवा बार्डर के दुल्हा कोठी के पास मेजर (हेड कांस्टेबल) की संदिग्ध हाल में मौत हुई थी। इसके बाद वर्ष 05-06 में बजहां बीओपी पर उत्तराखंड के निवासी एक जवान की जान चली गई।
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एक कार्यक्रम के दौरान हुई इस घटना के वक्त एसएसबी और सिविल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बीओपी पर ही मौजूद रहे। घटना का कारण जवान की पैर फिसलकर मौत बताया गया था। तीसरी घटना 22 मई 2014 की है।
बजहां बीओपी पर तैनात बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी गांव निवासी रजनीश कुमार नामक कांस्टेबल ने अपनी सर्विस रायफल से गोली मारकर जान दे दी थी। गुरुवार को पकड़िहवा में एएसआई खूबराम की मौत चौथी घटना थी। गौरतलब बात यह है कि जवानों की मौत की घटनाएं फरमाने वाली बात है कि यह घटनाएं एसएसबी द्वितीय वाहिनी के अलीगढ़वा कंपनी के अंतर्गत ही हुई हैं।