इस दिन से लागू होगी सिम बाइंडिग, साइबर फ्रॉड रोकने के लिए सरकार की कवायद!

Bhaskar Tiwari
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉमBhaskar Tiwari
Sun, 25 Oct 2026 01:46 AM IST

    साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए सरकार डिजिटल सुरक्षा से जुड़े नियमों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। इसी कड़ी में SIM Binding का मुद्दा चर्चा में है। इस व्यवस्था के तहत WhatsApp, Telegram और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स पर अकाउंट चलाने के लिए उससे जुड़ा सक्रिय SIM कार्ड उसी मोबाइल फोन में मौजूद रखना जरूरी हो सकता है। इसका उद्देश्य मोबाइल नंबर और मैसेजिंग अकाउंट के बीच संबंध को मजबूत करना है, ताकि फर्जी अकाउंट, नंबर के दुरुपयोग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों को रोकने में मदद मिल सके। खास तौर पर उन मामलों में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है, जहां ठग किसी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके लोगों को मैसेज भेजते हैं या खुद को किसी परिचित, बैंक अथवा सरकारी संस्था का प्रतिनिधि बताकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।

    दूरसंचार विभाग यानी DoT ने 28 नवंबर 2025 को प्रमुख मैसेजिंग ऐप्स को SIM Binding लागू करने के निर्देश दिए थे। शुरुआत में कंपनियों को इसके लिए 90 दिनों का समय दिया गया था, लेकिन बाद में तकनीकी चुनौतियों के चलते अनुपालन की समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाए जाने की खबर सामने आई। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होने की तैयारी है। हालांकि, यूजर्स को प्रभावित करने वाले बदलाव ऐप्स के अनुपालन और लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार सामने आएंगे।

    SIM Binding लागू होने के बाद WhatsApp, Telegram और अन्य संबंधित ऐप्स का इस्तेमाल करने के लिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सक्रिय SIM उसी डिवाइस में रखना जरूरी हो सकता है। अगर कोई यूजर SIM कार्ड निकालकर केवल Wi-Fi की मदद से मैसेजिंग ऐप चलाता है, तो उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह, जिन लोगों के फोन में एक नंबर का SIM है, लेकिन वे दूसरे डिवाइस पर उस नंबर से जुड़ा अकाउंट इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी अपनी उपयोग की आदतों में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर संबंधित ऐप के लागू किए गए सिस्टम पर निर्भर करेगा।

    सरकार का मानना है कि SIM Binding से उन साइबर अपराधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है, जो भारतीय मोबाइल नंबरों का गलत इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बनाते हैं। इससे फिशिंग, फर्जी पहचान बनाकर ठगी करने और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में इस्तेमाल होने वाले अकाउंट की पहचान और निगरानी आसान हो सकती है। दूसरी ओर, यूजर्स को अपने रजिस्टर्ड SIM को सक्रिय रखना चाहिए, अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए और किसी के साथ OTP या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। कुल मिलाकर, SIM Binding डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की एक पहल है, लेकिन ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है।

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