लोगों को धोखा देने के लिए ऐसे किया जाता है मिरर-इमेजिस साइट्स का इस्तेमाल

टेक डेस्क, अमर उजाला
Thu, 15 Mar 2018 04:48 PM IST
scammers cheat people through mirror images sites

    ऑनलाइन स्कैमर्स ने लोगों की संवेदनशील जानकारी पाने के लिए अब एक नया तरीका इजाद कर लिया है। स्कैमर्स लोनों की सोशल मीडिया, बैंक अकाउंट पासवर्ड जैसी जानकारियां लेकर उनको लूटते हैं। अपने काम को अंजाम देने के लिए वह एक ऑफिशल वेबसाइट भेजते हैं जिस पर क्लिक करने के बाद लोगों से उनकी जानकारी पूछी जाती है। जैसे ही नकली वेबसाइट पर जानकारी भेजी जाती है वैसे ही अपराधी लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं।

    ऐसा ही कुछ पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार में रहने वाले बिजनेसमैन के साथ भी हुआ। ऐसे ही गिरोह के एक सदस्य ने खुद को ब्राजीलियन बिजनेस विमेन बताकर पीड़ित से फेसबुक पर संपर्क किया। महिला ने बताया कि वह यूनाइटेड किंग्डम में एक मेजर गैस कंपनी में कार्यरत है। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसे फेसबुक पर स्टेफनी एंडरसन नामक महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। जिसके बाद दोनों ने फेसबुक पर चैट करना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद महिला ने उसके साथ एक बिजनेस शुरू करने की बात कही। साथ ही इसके लिए 27 लाख यूएस डॉलर निवेश करने को भी कहा। फिर कुछ समय बाद महिला ने उसे 7 लाख डॉलर भेजने की रसीद भी दिखाई।

    इसके बाद महिला ने पीड़ित से कहा कि उसने अपने कुछ कागज भी भेजे हैं। जिन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में जमा करना आवश्यक है ताकि उसके द्वारा भेजे गए 7 लाख यूएस डॉलर सुरक्षित रह सकें। महिला ने फिर उसे किसी और व्यक्ति का नंबर दिया जिसका नाम डेविड मार्क था। जिसमें व्यक्ति ने पीड़ित से यूके से ट्रांस्फर किए गए पैसों की ट्रांस्फर फीस मांगी। यह सब बातें पीड़ित व्यक्ति ने अपनी शिकायत में दर्ज करवाई हैं। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति ने अपनी ईमेल आईडी उस व्यक्ति को दी जो खुद को आरबीआई का सानियर मैनेजर बता रहा था। फिर उसे एक ऐसी वेबसाइट दी गई जो आरबीआई की वेबसाइट जैसी ही थी।

    डेविड नामक व्यक्ति ने उसे कोड और आईडी दी व उसे सारी अकाउंट डीटेल उस पर भेजने को कहा। डेविड नामक व्यक्ति ने पीड़ित से वादा किया कि उसके अकाउंट में 4 करोड़ रुपये पहुंच जाएंगे। लेकिन जैसे ही पीड़ित ने 6 लाख रुपये की ट्रांसफर फीस जमा की वैसे ही वो वेब पेज काम करना बंद हो गया। कुछ समय बाद महिला ने अपनी फेसबुक आईडी भी डिलीट कर ली और उसका नंबर भी अनअवेलेबल आने लगा।

    यूं बचें ऐसे अपराधों से

    लोगों को धोखा देने के लिए ऐसे किया जाता है मिरर-इमेजिस साइट्स का इस्तेमाल

    - वेब ब्राउजर की फिल्टर सेटिंग को मजबूत करें।

    - लिंक के द्वारा खुली वेबसाइट पर जानकारी देते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

    - यह चेक करना चाहिए कि कुछ सेकेंड के बाद यूआरएल चेंज हो रहा है या नहीं।

    - एक से अधिक टैब नहीं खोलनी चाहिए।

    - अविश्वसनीय वेबसाइट को कभी नहीं खोलना चाहिए।

    साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के अपराधों को ' टैबकैपिंग ' कहा जाता है। आजकल ऐसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। 'टैबनैपिंग' शब्द दो शब्दों टैब और किडनैपिंग से मिलकर बना है। इस प्रकार की घटनआों का एक कारण लोगों द्वारा अपने कंप्यूटर को वायरस से बचाने के लिए एंटी माल्वेयर सिस्टम का प्रयोग करना भी है। पुलिस ने कहा कि इस प्रकार डेटा चोरी करने वाली टैबकैपिंक की पुलिस जांच कर रही है।

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