साइबर फ्रॉड: AI के दौर में बैंक और पर्सनल डेटा को कैसे रखें सुरक्षित? आज ही करें ये 5 काम

कुलदीप शर्मा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीकुलदीप शर्मा
Wed, 28 Oct 2026 07:18 PM IST
सार

साइबर सुरक्षा को लेकर AI और ऑटोमेशन के दौर में केवल जागरूकता काफी नहीं है। क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और एआई-संचालित सिक्योरिटी सिस्टम को अपनाना जरूरी। एआई के इस डिजीटल दौर में अपने डेटा को कैसे सिक्योर करें आइए जानते हैं।

Cybersecurity in the AI Era Beyond Awareness to Critical Infrastructure Resilience how to secure private data
प्रतीकात्म इमेज - फोटो : Amar Ujala Digital

    विस्तार

    डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में साइबर अपराधियों ने ठगी के तरीके पूरी तरह बदल दिए हैं। अब फिशिंग ईमेल में ग्रामर की गलतियां ढूंढकर या अनजान नंबर से आई कॉल पर सिर्फ सतर्क रहकर बचना मुमकिन नहीं रह गया है। हैकर्स अब एआई वॉयस क्लोनिंग, डीपफेक और ऑटोमेटेड मैलेशियस बॉट्स का इस्तेमाल करके आपके फोन और बैंक अकाउंट में सेंध लगा रहे हैं।

    क्या है AI स्कैम का नया तरीका?

    • एआई वॉयस क्लोनिंग: सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए आपके किसी छोटे से ऑडियो या वीडियो से स्कैमर या हैकर्स जो साइबर फ्रॉड करते हैं आपकी आवाज को कॉपी करके एआई की मदद से आपके रिश्तेदारों या कलीग्स को सैम टू सैम आपकी ही आवाज में अर्जेंट बताकर रुपये मांगते हैं।
    • स्मार्ट फिशिंग और डीपफेक: एआई के ज़रिए बिना किसी स्पेलिंग मिस्टेक के फर्जी बैंक नोटिस और ऑफिशियल मैसेज तैयार किए जा रहे हैं, जो देखने में 100% असली लगते हैं।
    • एजेंटिक बोट्स और API अटैक: हैकर्स अब मशीन स्पीड पर काम करने वाले AI टूल्स के ज़रिए फोन ऐप्स और बैंकिंग एपीआई की कमियों का पता लगाकर बिना किसी ओटीपी के भी डेटा चुरा रहे हैं।

    स्कैमर से डेटा को कैसे बचाएं?

    1. सीक्रेट कोड करें फिक्स:अगर आपके पास किसी जान-पहचान वालों का अर्जेंट कॉल आता है जिसमें कुछ रुपयोें की लेन-देन की बात की जा रही हो तो तत्काल उसे पैसे न भेजें। एआई से आवाज बदलकर स्कैम करने वालों को मात देने के लिए फैमिली के बीच एक सीक्रेट कोड या कोई ऐसा शब्द तय करें जो सिर्फ आपस में ही पता हो। अगर कॉल करने वाला स्कैमर वह कोड या शब्द नहीं बता पाए तो समझ जाएं कि कॉल फर्जी है।
    2. गलतियां ही नहीं, चेक करें पूरी प्रक्रिया:पहले के दौर में फर्जी मैसेज में स्पेलिंग की गलतियां होती थीं, लेकिन एआई से बने मैसेज में कोई गलती नहीं होती। इसलिए मैसेज के कंटेंट को देखने के बजाय बैंकिंग प्रोसेस को जांचें। बैंक कभी भी फोन या अनऑफिशियल लिंक पर पिन या पासवर्ड अपडेट करने को नहीं कहता। हमेशा आधिकारिक बैंकिंग ऐप या वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।
    3. बायोमीट्रिक और ऐप परमिशन की समीक्षा करें:अपने स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर उन ऐप्स की परमिशन तुरंत रद्द करें जिन्हें माइक, कैमरा या कांटेक्ट्स की जरूरत नहीं है। बैंकिंग ऐप्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के साथ-साथ बायोमीट्रिक लॉक को हमेशा एक्टिव रखें।
    4. सोशल मीडिया पर ऑडियो-वीडियो शेयरिंग में सावधानी:सोशल मीडिया पर अपने हाई-क्वालिटी वॉयस सैंपल या HD वीडियो सार्वजनिक रूप से शेयर करने से बचें। साइबर अपराधी इन्हीं कंटेंट का इस्तेमाल एआई मॉडल को ट्रेन करने और आपकी क्लोनिंग करने के लिए करते हैं।
    5. स्पैम कॉल्स और लिंक्स के लिए AI-संचालित टूल्स का उपयोग:जैसे हैकर्स एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसे ही बचाव के लिए भी एआई आधारित टूल्स का उपयोग करें। इनबिल्ट कॉलर आईडी, स्पैम ब्लॉकिंग सेटिंग्स और भरोसेमंद एंटी-वायरस फीचर्स चालू रखें। किसी भी अनजान लिंक या क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें।

    जितने सतर्क रहेंगे स्कैम से उतने ही बचे रहेंगे

    डिजिटल युग में आपकी सतर्कता ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। बैंकिंग लेनदेन के लिए हमेशा सिक्योर नेटवर्क का उपयोग करें और सार्वजनिक वाई-फाई पर संवेदनशील डेटा खोलने से बचें। याद रखें, एआई के इस दौर में सुरक्षा कोई एक बार का काम नहीं, बल्कि निरंतर ध्यान रखने वाली आदत है।