Storage: फोन में 64, 128 और 256GB ही क्यों मिलती है स्टोरेज; 100 या 200GB का डिवाइस क्यों नहीं बनाती कंपनियां?

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 19 Nov 2025 05:59 PM IST
सार

Science Behind Storage Device:

क्या आपने कभी सोचा है कि स्मार्टफोन में 64GB, 128GB या 256GB जैसे ही स्टोरेज विकल्प क्यों मिलते हैं, जबकि 100GB या 200GB स्टोरेज कभी नहीं दिखतीं? आइए जानते हैं इसकी क्या वजह है।

why phone and computer storage comes in 64gb 128gb not 100gb or 200gb
स्टोरेज डिवाइस मेमरी - फोटो : AI

    विस्तार

    स्मार्टफोन और स्टोरेज डिवाइस में अक्सर 64GB, 128GB, 256GB जैसे स्टैंडर्ड स्टोरेज विकल्प ही देखने को मिलते हैं। कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि कंपनियां 100GB या 200GB जैसी स्टोरेज क्यों नहीं बनातीं? दरअसल, इसके पीछे कंप्यूटर साइंस का एक बेसिक नियम है, जो मेमोरी स्ट्रक्चर को तय करता है।

    क्यों मिलती है 64GB, 128GB, 256GB जैसी स्टोरेज?

    आपको बता दें कि इसके पीछे की वजह डिजिटल डिवाइस का बाइनेरी सिस्टम है। कंप्यूटर और फोन में मौजूद स्टोरेज बाइनरी सिस्टम (Binary System) काम करता है, जो हर डिजिटल डिवाइस का आधार है। कंप्यूटर्स और मोबाइल्स डेटा को 0 और 1 यानी बाइनरी फॉर्म में स्टोर करते हैं। इसलिए उनकी मेमोरी भी 2 की शक्तियों (Power of 2) पर आधारित होती है और मल्टीप्लाई होती रहती है।

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    आसान भाषा में समझें तो अगर मेमरी 4GB है तो इससे ऊपर की मेमरी 4x4GB= 16GB होगी, न की 15GB या 20GB। यानी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने पर इसे दोगुना साइज में बढ़ाना पड़ता है। इसलिए आपको स्मार्टफोन, हार्ड डिस्क या मेमरी कार्ड में 64GB, 128GB, 256GB या 512GB का स्टोरेज देखने को मिलता है।

    100GB, 200GB या 500GB स्टोरेज क्यों नहीं बनती?

    चूंकि बाइनेरी सिस्टम में मेमरी साइज हमेशा डबल होता है, 100GB या 200GB का स्टोरेज साइज बाइनेरी सिस्टम में फिट नहीं बैठता। अगर इस साइज का स्टोरेज बनाने की कोशिश की जाए तो इसके लिए डिवाइस के सॉफ्टवेयर से लेकर हार्डवेयर तक में बदलाव करना पड़ेगा। यही नहीं, स्टोरेज बनाने वाली कंपनियों को अपने मशीनों में भी बदलाव करना होगा जो काफी खर्चीला और परेशानी वाला साबित होगा। इसलिए इस परेशानी से बचने के लिए बाइनेरी सिस्टम के अनुसार ही स्टोरेज डिवाइस शुरुआत से आ रहे हैं।

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    64GB, 128GB, 256GB जैसे साइज एक स्टैंडर्ड पैटर्न फॉलो करते हैं जिससे कंपनियां बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकती हैं, लागत कम कर सकती हैं और परफॉर्मेंस भी स्थिर रख सकती हैं। डिवाइस में काम करने वाले RAM, ROM और प्रोसेसर भी बाइनरी-साइज में ही बेहतर काम करते हैं।

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