सोशल मीडिया: यूजर्स की पोस्ट के लिए कंपनियां भी होंगी जवाबदेह, 'सेफ हार्बर' नियम क्यों बदलना चाहती है सरकार?

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Thu, 05 Nov 2026 01:20 PM IST
सार

Indian Govt May Remove Safe Harbour Rule: भारत सरकार सोशल फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलने वाली कानूनी छूट को खत्म कर सकती है। आईटी मंत्रालय इन कंपनियों को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' का अधिकार वापस लेने पर विचार कर रहा है। इस बदलाव के बाद यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए अब सीधे तौर पर कंपनियों को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

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सोशल मीडिया के सेफ हार्बर नियमों में हो सकता है बदलाव। - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    Social Media Safe Harbor: भारत सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के लिए मौजूदा कानूनी नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी 'सेफ हार्बर' खत्म करने या सीमित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो यूजर्स की ओर से पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए इन कंपनियों को भी जवाबदेह माना जाएगा। इसके अलावा, सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नए फीचर लॉन्च करने से पहले सूचना देने और यूजर्स की शिकायतों के समाधान से जुड़े नियम भी सख्त करना चाहती है।

    सेफ हार्बर के तहत कंपनियों को क्या मिलती है छूट?

    • भारत में सोशल मीडिया कंपनियों को आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79 के तहत सेफ हार्बर का कानूनी संरक्षण मिलता है। इसके तहत फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म आमतौर पर अपने यूजर्स की ओर से पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराए जाते। हालांकि, यह सुरक्षा कुछ शर्तों और तय नियमों का पालन करने पर ही मिलती है।
    • सरकार का मानना है कि अब ये कंपनियां सिर्फ मैसेज पहुंचाने वाली नहीं रह गई हैं। ये अपने खास एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके यह तय करती हैं कि कौन सा पोस्ट वायरल होगा और यूजर को क्या दिखेगा, जो अक्सर भारतीय कानूनों के खिलाफ भी होता है। इसे एक तरह का एडिटोरियल कंट्रोल माना जा रहा है, इसलिए सरकार इन्हें आम इंटरनेट कंपनियों जैसे टेलिकॉम या इंटरनेट प्रोवाइडर्स से अलग रखना चाहती है।

    क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

    • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कंटेंट और उनके एल्गोरिदम को लेकर सरकार की चिंता पिछले कुछ समय में बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार का मानना है कि कई मौकों पर इन प्लेटफॉर्म ने विपक्ष या सरकार की आलोचना से जुड़े कंटेंट को ज्यादा पहुंच दी, जबकि आधिकारिक सरकारी जानकारी को उतनी प्राथमिकता नहीं मिली।
    • जुलाई में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान इंस्टाग्राम की भूमिका भी इस चर्चा की एक वजह मानी जा रही है। इस दौरान प्लेटफॉर्म पर विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी सामग्री और ऑनलाइन समर्थन जुटाने की गतिविधियां सामने आई थीं। सरकार यह समझना चाहती है कि सोशल मीडिया कंपनियां किस आधार पर तय करती हैं कि कौन-सा कंटेंट ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा।
    • इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक पर कुछ समय के लिए भारत में उपलब्ध नहीं रहा था। इसके बाद जुलाई में आईटी मंत्रालय ने मेटा के ग्लोबल अधिकारियों को तलब किया था। बैठक में डीपफेक और भारतीय कानूनों के पालन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए थे।
    • एलन मस्क की कंपनी एक्स के साथ भी सरकार का विवाद चल रहा है। कंपनी ने ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक करने और हटाने के लिए सरकार की ओर से अपनाए जा रहे तरीके, जिसमें सहयोग पोर्टल भी शामिल है, को चुनौती दी थी। सितंबर 2025 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक्स की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद कंपनी ने अपील दायर की।
    सेफ हार्बर नियम सोशल मीडिया कंपनियों को सुरक्षा देता है।
    सेफ हार्बर नियम सोशल मीडिया कंपनियों को सुरक्षा देता है। - फोटो : अमर उजाला

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से भी बढ़ी चर्चा

    • सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी ने भी इस बहस को आगे बढ़ाया है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस बनाम एस. हरिश मामले में कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को सोशल मीडिया पर फैलने से रोकने में कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
    • 15 अक्टूबर के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा धारा 79 लगातार हो रही नियामकीय चूक से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट के मुताबिक, सामान्य नियमों का पालन न करने पर सेफ हार्बर खत्म करना बहुत कड़ा कदम हो सकता है, जबकि गंभीर उल्लंघनों को रोकने के लिए यह हमेशा पर्याप्त भी नहीं है।
    • कोर्ट ने अलग व्यवस्था बनाने की बात कही, जिसमें गलती की गंभीरता के हिसाब से आर्थिक जुर्माना लगाया जा सके। सेफ हार्बर खत्म करने जैसे कदम को गंभीर मामलों में आखिरी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया।
    • इससे पहले अगस्त में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने भी सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। समिति ने भारतीय कानूनों का पालन नहीं करने वाले प्लेटफॉर्म से सेफ हार्बर सुरक्षा वापस लेने की सिफारिश की थी।

    नए फीचर लॉन्च करने से पहले देनी पड़ सकती है जानकारी

    • सरकार केवल सेफ हार्बर तक ही बदलाव सीमित नहीं रखना चाहती। वह इस बात पर भी विचार कर रही है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को अपने बड़े और यूजर्स की सुरक्षा से जुड़े नए फीचर लॉन्च करने से पहले सरकार को जानकारी देनी चाहिए।
    • इस प्रस्ताव के पीछे वॉट्सऐप के यूजरनेम फीचर को लेकर हुआ विवाद भी एक वजह है। इस फीचर के जरिए यूजर्स बिना फोन नंबर साझा किए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। जुलाई में आईटी मंत्रालय ने व्हाट्सएप को इस फीचर का रोलआउट रोकने का निर्देश दिया था। मंत्रालय को आशंका थी कि इसका गलत इस्तेमाल करके फर्जी पहचान, फिशिंग और आर्थिक धोखाधड़ी की जा सकती है।
    • सरकार अब ऐसा औपचारिक सिस्टम बनाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत कंपनियां किसी बड़े बदलाव को लागू करने से पहले उसकी जानकारी दे सकें। इससे संभावित सुरक्षा जोखिमों पर पहले ही चर्चा की जा सकेगी।

    डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायतों पर भी सख्ती

    • सरकार सोशल मीडिया यूजर्स के लिए शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान पाने की मौजूदा व्यवस्था में भी बदलाव चाहती है। खासतौर पर डीपफेक, बिना सहमति के शेयर की गई निजी तस्वीरों और आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के लिए ज्यादा प्रभावी सिस्टम बनाने पर चर्चा हो रही है।
    • सरकार का मानना है कि अभी ऐसे मामलों में पीड़ितों को पर्याप्त मदद नहीं मिलती। कई बार शिकायतों पर कार्रवाई का फैसला प्लेटफॉर्म की अपनी कंटेंट मॉडरेशन टीमों पर निर्भर रहता है। प्रस्तावित बदलावों के तहत कंपनियों को प्रभावित यूजर्स की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए कहा जा सकता है।
    • फिलहाल ये सभी प्रस्ताव चर्चा के स्तर पर हैं। अगर सरकार इन्हें लागू करने का फैसला करती है, तो सोशल मीडिया कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी और भारत में उनके काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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