ई-वॉलेट से हो रही धोखाधड़ी में क्या है कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी, कैसे वापस ले सकते हैं अपनी जमापूंजी

Harendra Chaudhary
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्लीHarendra Chaudhary
Tue, 08 Sep 2020 05:41 PM IST
सार
What is the legal responsibility of companies in e-wallet KYC fraud, how can you claim your money back
digital wallet - फोटो : Amar Ujala (File)

    विस्तार

    डिजिटलीकरण बढ़ने के साथ-साथ गूगल-पे, फोन-पे, मोबीक्विक और पेटीएम जैसे ई-वॉलेट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सरकार भी भीम एप के जरिए लेनदेन को प्रोत्साहित कर रही है। लेकिन इनके बढ़ते चलन के साथ ही इनके जरिए होने वाले आर्थिक फ्रॉड की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों की शिकायत है कि सुरक्षित लेनदेन का दावा करने वाली इन एप्स से कोई फ्रॉड हो जाने के बाद पैसों की वापसी की कोई संभावना नहीं रह जाती। पुलिस और साइबर सेल में शिकायत के बाद भी पैसों की बरामदगी नहीं हो पा रही है। इस तरह के लेनदेन में पैसा एक खाते से दूसरे खाते में जाता है, जिनमें पाने वाले की पहचान करना आसान होता है। ऐसे में क्या कारण है कि पुलिस ऐसे अपराधियों तक नहीं पहुंच पा रही है और लोगों के पैसों की बरामदगी क्यों नहीं हो पा रही है?

    उपयोगकर्ता की हर जगह पहचान अनिवार्य

    ई-वॉलेट को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने इन वॉलेट्स पर अकाउंट खोलने के लिए केवाईसी (Know Your Customer) वेरीफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। जिस मोबाइल नंबर पर ये वॉलेट उपयोग किए जाते हैं, उन्हें खरीदने के लिए भी पहचान पत्र देना अनिवार्य होता है। साथ ही इन वॉलेट्स के जरिए जिन बैंक खातों में पैसों की लेन-देन की जाती है, उनको खोलने के समय भी सभी उपयोगकर्ताओं की पूरी पहचान उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है। इस प्रकार किसी भी लेन-देन में फ्रॉड होने पर इन तीन मुख्य स्तरों पर अपराधी की पहचान करना और उन तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान होता है।

    फिर क्यों नहीं पकड़ पाती है पुलिस

    दिल्ली पुलिस साइबर क्राइम विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक केवाईसी वेरीफिकेशन और बैंकों के जरिए लेनदेन होने के कारण अपराधियों तक पहुंचना आसान अवश्य होता है। लेकिन इस तरह के अपराध को अंजाम देने वाले अपराधी फर्जी पहचान पत्र के जरिए अपनी वेरीफिकेशन कराते हैं। उनके बैंक अकाउंट खोलने के लिए भी इसी तरह के फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि इन अपराधियों तक पहुंच पाना बेहद मुश्किल काम होता है।

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