उत्तर प्रदेश एमएसएमई विभाग और कू एप ने मिलाया हाथ, एक जिला-एक उत्पाद को मिलेगा बढ़ावा
एमओयू के तहत कू एप, ओडीओपी प्रोडक्ट को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी डिटेल को प्रमोट करने के लिए 10 भाषाओं में मौजूद अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेगा।

विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग और माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू एप के बीच एक एमओयू साइन हुआ है। इस एमओयू से प्रदेश के 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) पहल को बढ़ावा मिलेगा। 27 जुलाई को उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम और निर्यात संवर्धन के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवनीत सहगल और कू एप के को-फाउंडर अप्रमेय राधाकृष्ण ने इस एमओयू पर साइन किया है।
एमएसएमई विभाग के मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने एमओयू साइन करने के दौरान कहा कि कू एप के साथ यह जुड़ाव हमारे ओडीओपी प्रोडक्ट को बड़े दर्शकों तक पहुंचाने में मदद करेगा और कई क्षेत्रीय भाषाओं में ओडीओपी से जुड़ी बातचीत को बढ़ावा मिलेगा। एमओयू के तहत कू एप, ओडीओपी प्रोडक्ट को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी डिटेल को प्रमोट करने के लिए 10 भाषाओं में मौजूद अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेगा। इसके अलावा यह एप ओडीओपी प्रोडक्ट को कॉरपोरेट गिफ्टिंग के लिए भी खरीदेगा।
यह एमओयू यूपी-ओडीओपी के डेवलपमेंट प्रोग्राम, योजनाओं की पहुंच और कम्युनिकेशन को भी बढ़ाएगा। यह एप गैर-अंग्रेजी भाषी लोगों के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों को ग्राहकों के बड़े वर्ग तक पहुंचाने और देशभर में अपना बिजनेस बढ़ाने में भी मदद करेगा। कू एप पर ओडीओपी का ऑफिशियल हैंडल @UP_ODOP भी बनाया गया है।

कू एप के को-फाउंडर अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश सरकार के साथ इस एमओयू पर साइन करते हुए हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। जब ओडीओपी प्रोडक्ट को पहल के माध्यम से विश्व स्तर पर बढ़ावा देने की बात आती है तो उत्तर प्रदेश एक अगुआ के रूप में उभरकर सामने आता है। हमारे लिए स्थानीय कारीगरों के स्किल को पूरे भारत में ले जाना और विभिन्न भाषाओं में इसे बढ़ावा देने में मदद करना वास्तव में एक खुशी की बात है।
क्या है एक जिला, एक उत्पाद?
वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना को 2018 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू किया गया है। इस योजना में स्किल्ड कारीगरों को उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी में सुधार करने के साथ विशेष स्वदेशी प्रोजक्ट एवं स्किल को प्रोत्साहित किया जाता है। इस योजना में कारीगरों की आय बढ़ाने और ज्यादा रोजगार पैदा करने के लिए प्रोडक्ट की मार्केटिंग और ब्रांडिंग में भी मदद की जाती है।