एंड्रॉयड फोन के साथ खतरा-ही-खतरा, नहीं मिल रहा सिक्योरिटी अपडेट

सस्ते ऑपरेटिंग सिस्टम होने और फ्री में मिल जाने के कारण एंड्रॉयड स्मार्टफोन की संख्या सबसे ज्यादा है। पूरी दुनिया में 77 फीसदी एंड्रॉयड स्मार्टफोन, 19 फीसदी आईओएस और 0.47 प्रतिशत माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज फोन हैं। एंड्रॉयड फोन की इतनी भारी संख्या होने के बावजूद इसे सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर क्योंकि एंड्रॉयड स्मार्टफोन सुरक्षित नहीं हैं? आइए जानते हैं।
सबसे पहले आपको बता दें कि भारत में मौजूद प्रत्येक 10 एंड्रॉयड स्मार्टफोन में से 9 में कोई-ना-कोई समस्या है। इस समय 100 से ज्यादा कंपनियां एंड्रॉयड फोन तैयार कर रही हैं और फोन के 60,000 से ज्यादा मॉडल्स पूरी दुनिया के बाजार में मौजूद हैं, लेकिन बावजूद इसके एंड्रॉयड फोन अपडेट नहीं हो रहे हैं। केवल भारत की बात करें तो यहां के एक तिहाई फोन को 2015 के बाद कोई अपडेट नहीं मिला है और कुछ डिवाइस को अपडेट मिला भी है तो यूजर्स ने अपडेट नहीं किए हैं। इसका खुलासा स्टेटकाउंटर की रिपोर्ट से हुआ है। इस समय भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या 3 करोड़ से ज्यादा हो गई है और इसी के साथ चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल बाजार हो गया है।
आज भी 31.7 प्रतिशत स्मार्टफोन में एंड्रॉयड लॉलीपॉप 5.1 पड़ा हुआ है
आंकड़ों की बात करें तो भारत में 5.1 लॉलपॉप और इससे पुराने वर्जन पर काम करने वाले स्मार्टफोन की संख्या 31.7 फीसदी है, वहीं 26.5 स्मार्टफोन फिलहाल एंड्रॉयड मार्शमैलो 6.0 व 6.0.1 पर काम कर रहे हैं। एंड्रॉयड नूगट और ओरियो वाले फोन की संख्या क्रमशः 36.1 और 5.8 फीसदी है। वहीं पूरी दुनिया में ओरियो वाले स्मार्टफोन की संख्या 10 फीसदी है।
अपडेट के मामले में मोबाइल निर्माता कंपनियां करती हैं खेल
सैमसंग, हुवावे और शाओमी जैसी मोबाइल कंपनियां गूगल के एंड्रॉयड ओएस को अपने हिसाब से मोडिफाई करती हैं और अपने फोन में डिफॉल्ट रूप से देती हैं। ऐसे में कई बार गूगल द्वारा जारी किया गया अपडेट काफी देर से मिलता है। इस मामले पर सैमसंग का कहना है कि वह मिड रेंज स्मार्टफोन के लिए अपडेट जारी करेगी।
नुकसान पहुंचाने वाले एप की भरमार
गूगल की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में भारत में कई एंड्रॉयड फोन को वायरस और मैलवेयर के जरिए निशाना बनाया गया। इस मामले में भारत पूरी दुनिया में तीसरे नंबर पर रहा। गूगल का कहना है कि प्ले-स्टोर के अलावा किसी दूसरे प्लेटफॉर्म से एप डाउनलोड करने पर खतरा 9 गुना बढ़ जाता है। वहीं गूगल मोबाइल निर्माता कंपनियों को गूगल प्रोटेक्ट के लोगों के साथ फोन को बाजार में पेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कुछ दिन पहले ही कंपनी ने भारत में #सिक्योरिटीचेककियाक्या नाम से अभियान चलाया था।
जब मोबाइल कंपनियों ने चुपके से बंद कर दिया अपडेट
इसी साल अप्रैल में जियोनी, ओप्पो और लेनोवो ने कई सारे अपडेट जारी नहीं किए। इसका खुलासा बर्लिन की सिक्योरिटी रिसर्च लैब ने किया है। मार्च 2018 में फेसबुक को एंड्रॉयड मोबाइल यूजर्स के कॉल और मैसेज का एक्सेस ऐप के जरिए मिल गया था। नवंबर 2017 में गूगल पर आरोप लगा था कि लोकेशन ऑफ होने के बावजूद गूगल यूजर्स को ट्रैक कर रहा था। पिछले साल नवंबर में ही एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 300 से ज्यादा ऐप चुपके से लोकेशन ट्रैक कर रहे हैं और विज्ञापन के लिए डाटा बेच रहे हैं।