ओपनएआई में कई साल से थी सुरक्षा खामी: कर्मचारियों ने बहुत पहले दी थी चेतावनी, रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?
- रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चैटजीपीटी के आने से पहले ही ओपनएआई के कर्मचारियों ने सुरक्षा चेतावनी दी थी।
- सेंट्रल कोड रिपॉजिटरी में संवेदनशील डेटा की आसान पहुंच से सवाल उठे।
- कॉन्फ्रेंस रूम में रिकॉर्डिंग डिवाइस मिलने से मामला गर्माया।
- डेटा बचाने के लिए कंपनी ने क्या कड़े कदम उठाए?

विस्तार
चैटजीपीटी बनाने वाली दुनिया की मशहूर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी OpenAI एक बार फिर विवादों में है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के कर्मचारी 2022 में चैटजीपीटी के लॉन्च होने से बहुत पहले से ही टॉप मैनेजमेंट को सुरक्षा खामियों को लेकर आगाह कर रहे थे। कर्मचारियों का डर था कि ढीली सुरक्षा नीतियों की वजह से कंपनी की सीक्रेट टेक्नोलॉजी विदेशी सरकारों या हैकर्स के हाथों में पड़ सकती है।
क्यों खड़ा हुआ सुरक्षा को लेकर विवाद?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे विवाद के पीछे कई बड़ी वजहें और हालिया घटनाएं शामिल हैं।
एक ही जगह सारा डेटा:
कंपनी में एक सेंट्रल कोड रिपॉजिटरी यानी 'मोनोरेपो' का इस्तेमाल किया जाता था। इसका मतलब यह है कि किसी भी कर्मचारी के पास एक्सेस होने पर वह उन प्रोजेक्ट्स और रिसर्च पेपर्स की तकनीकी डिटेल्स भी देख सकता था, जिनसे उसका कोई लेना-देना नहीं था। नए AI कोडिंग टूल्स आने के बाद इस तरह की गुप्त जानकारी खोजना और भी आसान हो गया। हालांकि OpenAI का कहना है कि उनके सबसे संवेदनशील मॉडल और डेटा अलग और सुरक्षित रखे गए हैं।
कॉन्फ्रेंस रूम से मिला जासूसी डिवाइस:
सुरक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब 30 सितंबर को कंपनी के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे एक छुपा हुआ ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। इस मामले में 9 अक्टूबर को कंपनी के ही एक 35 वर्षीय इंजीनियर, अब्दुलरहमान अलफोजान को गिरफ्तार किया गया। आरोपी पर गोपनीय चर्चाएं रिकॉर्ड करने की कोशिश और कंपनी के अंदरूनी सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं।
कंपनी ने अब क्या कदम उठाए हैं?
इन गंभीर खामियों और घटनाओं के सामने आने के बाद OpenAI ने अपनी आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए बड़े बदलाव किए हैं।
- इंजीनियरों की री-असाइनमेंट:कंपनी ने अपने लगभग 25% प्रोडक्शन इंजीनियरों को केवल इंटरनल सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के काम में लगा दिया है।
- सख्त एक्सेस कंट्रोल:अब रिसर्चर्स के टेस्टिंग एनवायरनमेंट और टूल्स की नियमित आधार पर सुरक्षा जांच की जा रही है।
- सिक्योरिटी स्प्रिंट और इनाम:कंपनी ने बाहरी सुरक्षा एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर अपने सिस्टम की कमियों को तलाशने के लिए एक नया सुरक्षा अभियान शुरू किया है। इसके अलावा, सिस्टम में बग या खामी ढूंढने वालों के लिए 'बग बाउंटी प्रोग्राम' का इनाम भी 4 गुना से ज्यादा बढ़ा दिया गया है।
अब आगे का रास्ता क्या है?
हालांकि OpenAI का दावा है कि उन्होंने अपने सिक्योरिटी सिस्टम को पहले से काफी ज्यादा सख्त कर लिया है और वे AI का इस्तेमाल करके ही सुरक्षा खामियों को ठीक कर रहे हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि जिस रफ्तार से कंपनी का आकार और तकनीक का दायरा बढ़ा है, उसके सामने अपने गुप्त डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।