UPI Rules: तीन महीने से बंद है फोन नंबर तो अब नहीं यूज कर पाएंगे UPI, 1 अप्रैल से बदल गए नियम
New UPI Rules From 1 April, 2025:
टेलीकॉम कंपनियां 90 दिनों तक बंद रहने वाले नंबरों को नए ग्राहकों को अलॉट कर देती हैं। ऐसे में यदि उस नंबर को मौजूदा बैंक अकाउंट से नहीं हटाया गया तो नंबर दोबारा एक्टिव होने पर उसका कंट्रोल दूसरे के पास जा सकता है।

विस्तार
1 अप्रैल (मंगलवार) से नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NCPI) ने यूपीआई के कुछ नियमों में बदलाव कर दिया है। UPI उपयोगकर्ताओं के साथ फ्रॉड को रोका जा सके, इसलिए NPCI ने यूपीआई मेंबर बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और थर्ड पार्टी यूपीआई एप्स को उन नंबरों से ट्रांजैक्शन बंद करने का निर्देश दिया है जो काफी समय से बंद हैं। NPCI ने चिंता जताई थी कि 3 महीने तक बंद रहने वाले नंबरों को टेलीकॉम कंपनियां दूसरे लोगों को अलॉट कर देती है, जिससे उन नंबरों से जुड़ें बैंक अकाउंट में फ्रॉड होने का खतरा बढ़ जाता है।

बैंकों और UPI एप्स को 1 अप्रैले से NCPI के निए नियमों का पालन करना होगा, जिसके तहत बंद हो चुके नंबरों को मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट (MNRL) में शामिल किया जाएगा। लोगों को ठगी से बचाने के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। बैंकों और यूपीआई एप्स को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि वह व्यक्ति जिसका नंबर बैंक अकाउंट में लिंक्ड हो वही यूपीआई का इस्तेमाल कर रहा हो। इसके अलावा बैंकों और डिजिटल पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने डेटा को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) में अपने डेटाबेस को हर हफ्ते अपडेट करना होगा। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि बंद हो चुके या दोबारा जारी होने वाले फोन नंबरों का रिकॉर्ड रखा जा सके और उनसे होने वाले ट्रांजैक्शन एरर को कम किया जा सके।
साइबर फ्रॉड को रोकना उद्देश्य
दरअसल, NCPI ने यह कदम साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए उठाया है। टेलीकॉम कंपनियां अक्सर 90 दिनों तक इनएक्टिव या बंद रहने वाले नंबरों को नए ग्राहकों को अलॉट कर देती हैं। ऐसे में उस नंबर से लिंक्ड बैंक अकाउंट में नंबर नहीं बदलवाने से उसका नियंत्रण दूसरे व्यक्ति के पास जा सकता है। ऐसे में फ्रॉड होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए NPCI ने बैंकों के साथ-साथ गूगल पे, फोन पे और पेटीएम समेत सभी यूपीआई एप्स को निर्देश दिया है कि वे हर हफ्ते इनएक्टिव मोबाइल नंबर की पहचान करें और उन्हें अपने सिस्टम से हटाएं।
इसका मतलब यह है कि अगर आपका मोबाइल नंबर लंबे समय तक इनएक्टिव रहता है तो उसे UPI से अपने आप हटा दिया जाएगा। यूजर्स को UPI सर्विस बंद करने का अलर्ट मैसेज भेजा जाएगा। चेतावनी के बावजूद यदि मोबाइल नंबर इनएक्टिव ही रहता है, तो उसे UPI सिस्टम से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बंद नंबरों से क्या है खतरा?
टेलीकॉम कंपनियां 90 दिनों तक बंद रहने वाले नंबरों को नए ग्राहकों को अलॉट कर देती हैं। ऐसे में यदि उस नंबर को मौजूदा बैंक अकाउंट से नहीं हटाया गया तो नंबर दोबारा एक्टिव होने पर उसका कंट्रोल दूसरे के पास जा सकता है। ऐसे में बैंक से आने वाले मैसेज, ओटीपी और कई तरह की जानकारियां उस नंबर पर जा सकती हैं। यह एक बड़ी खामी है जिसे NCPI दूर करने की कोशिश कर रहा है।
आपको क्या करना चाहिए
- अगर आपका किसी बैंक में अकाउंट है और उसमें ऐसा नंबर लिंक है जो काफी समय से बंद है तो उसे तुरंत अपडेट कराएं।
- बैंक अकाउंट में उसी नंबर को लिंक करवाएं जो हमेशा एक्टिव रहता हो और उसे आप इस्तेमाल करते हों।
- अगर आपने नंबर बदला है तो बिना देर किए बैंक में नया नंबर रजिस्टर करवाएं।