Meta AI Project: कर्मचारियों की जासूसी करना मेटा को पड़ा भारी, बंद हुआ सीक्रेट AI प्रोजेक्ट; जानें मामला

Jagriti
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीJagriti
Tue, 23 Jun 2026 11:25 AM IST
सार

Meta Employee Data Leak

: मेटा ने अपने कर्मचारियों के कंप्यूटर क्लिक्स, कीस्ट्रोक्स और माउस मूवमेंट को रिकॉर्ड करने वाले AI ट्रेनिंग प्रोजेक्ट को अचानक रोक दिया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला तब लिया गया, जब AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए जुटाया गया कर्मचारियों का संवेदनशील डेटा कंपनी में ही लीक हो गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर यह प्रोजेक्ट क्या था और डेटा लीक की नौबत कैसे आई? आइए जानते हैं विस्तार से...

Meta halts secret AI project after spying employees and leaking data
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    Meta AI Training Program:

    मेटा ने इसी साल अप्रैल 2026 में ही मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव (MCI) नाम का एक इंटरनल AI ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया था। इसे कंपनी की मेटा सुपर सुपरइंटेलिजेंस लैब्स टीम ने विकसित किया था।

    इस प्रोग्राम का उद्देश्य एआई मॉडल्स को यह सिखाना था कि इंसान कंप्यूटर का इस्तेमाल किस तरह करते हैं। जैसे मान लीजिए ड्रॉपडाउन मेन्यू चुनना, कीबोर्ड शॉर्टकट्स का उपयोग करना या विभिन्न स्क्रीन पर नेविगेट करना जैसी गतिविधियों को समझाने के लिए कर्मचारियों के वास्तविक उपयोग पैटर्न को रिकॉर्ड किया जा रहा था।

    कर्मचारियों की कौन-कौन सी गतिविधियां रिकॉर्ड हो रही थीं?

    रिपोर्ट्स के अनुसार यह सिस्टम कर्मचारियों के कीबोर्ड की-स्ट्रोक्स, माउस की हरकतें, क्लिक करने के पैटर्न और वर्कस्टेशन पर होने वाली गतिविधियां जैसी गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहा था।

    मेटा का कहना था कि यह डेटा केवल AI मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और इसके लिए पर्याप्त प्राइवेसी सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।

    डेटा लीक कैसे हुआ ?

    • एक मीडिया आउटलेट की रिपोर्ट के अनुसार मामला तब गंभीर हुआ, जब आंतरिक डेटा कंपनी के अधिक व्यापक नेटवर्क में उपलब्ध हो गया।
    • बिजनेस इनसाइडर की ओर से देखे गए स्क्रीनशॉर्ट्स में कर्मचारियों की बेहद पर्सनल चैट (निजी बातचीत), परफॉर्मेंस डेटा और मीटिंग्स के ट्रांसक्रिप्शन पूरी कंपनी के सामने आ गए।
    • SEV 2 श्रेणी की घटना: इस भीषण डेटा लीक की गंभीरता को देखते हुए मेटा ने इसे आंतरिक रूप से SEV 2 (0 से 5 के स्केल पर, जहां 0 सबसे गंभीर होता है) श्रेणी के बड़े खतरे में रखा है

    कर्मचारियों में बढ़ा असंतोष

    • इतने बड़े पैमाने पर डेटा लीक होने पर कर्मचारियों ने कंपनी की डेटा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। असल में, जब यह प्रोग्राम लाया गया था, तो इसे ज्यादातर स्टाफ के लिए अनिवार्य कर दिया गया था, जिससे कर्मचारी पहले से ही असहज थे। लेकिन मेटा ने शुरुआत में वादा किया था कि इस डेटा का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं होगा और इसे पूरी तरह लॉकडाउन (सुरक्षित) रखा जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी वजह से कर्मचारियों में नाराजगी जारी है।
    • यहां तक की एक कर्मचारियों ने कंपनी के आंतरिक ग्रुप में लिखा, मैं बहुत गुस्से में हूं। भले ही मुझे किसी बाहरी या दुर्भावनापूर्ण एक्सेस का कोई सबूत नहीं दिख रहा, लेकिन यह डेटा मूल वादे के मुताबिक पूरी तरह सुरक्षित और लॉकडाउन न होना बेहद निराशाजनक है।

    मेटा ने क्या कहा?

    • इस मामले में मेटा के प्रवक्ता का भी बयान सामने आया। उनका कहना है कि हमने इस प्रोग्राम को गोपनीयता सेफगार्ड्स के साथ बहुत सावधानीपूर्वक डिजाइन किया था। फिलहाल हमें कोई ऐसा संकेत नहीं मिला है कि मेटा के किसी कर्मचारी ने लीक डेटा का अनुचित इस्तेमाल किया हो, लेकिन हम पूरी जांच होने तक इस प्रोग्राम को रोक रहे हैं।
    • हालांकि, इस रोक के बावजूद मेटा एआई के लिए डेटा जुटाने के अपने इरादों से पीछे नहीं हट रहा है। एक अलग मेमो में मेटा के सीटीओ (CTO) एंड्र्यू बोस्वर्थ ने खुलासा किया है कि कंपनी अपने AI for Work प्रयासों के तहत आंतरिक डेटा संग्रह को और तेज करेगी, जिसे अब Agent Transformation Accelerator (ATA) का नया नाम दिया गया है।

    एआई मॉडल्स को इंसानों जैसा बनाने की कोशिश

    • मेटा का मानना था कि भविष्य में ऐसे एआई एजेंट विकसित किए जाएंगे जो लोगों की रोजमर्रा की कंप्यूटर गतिविधियों में मदद कर सकें।
    • कंपनी के अनुसार अगर एआई को इंसानों की तरह काम करना सिखाना है, तो उसे यह समझना भी जरूरी है कि लोग वास्तव में कंप्यूटर के साथ कैसे इंटरैक्ट करते हैं।
    • यही वजह थी कि कर्मचारियों की वास्तविक गतिविधियों के आधार पर AI मॉडल्स को प्रशिक्षित किया जा रहा था।

    कर्मचारियों के लिए क्यों था अनिवार्य?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रोग्राम कंपनी के अधिकतर कर्मचारियों के लिए अनिवार्य था। यही वजह रही कि शुरुआत से ही कई कर्मचारियों ने इस पहल को लेकर असहजता जताई थी। उन्हें चिंता भी थी, कि इससे उनकी पसर्नल लाइफ की एक्टिविटीज और व्यवहार को रिकॉर्ड किए जा रहे हैं।

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