AI Stack: भारत में बनेगा 'कंप्लीट एआई स्टैक', स्टार्टअप्स और रिसर्च को मिलेगा बड़ा डेटा सपोर्ट- जयंत चौधरी

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Fri, 20 Feb 2026 04:05 PM IST
सार

Complete AI Stack: भारत सरकार एआई नवाचार को तेज करने के लिए 'कंप्लीट एआई स्टैक' विकसित करने की योजना बना रही है। इसमें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, कंप्यूटिंग संसाधन और गुप्त डेटा सेट शामिल होंगे। इन डेटा सेट को शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे नए एआई समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी।

India Plans Complete AI Stack with Secure Datasets and Massive GPU Expansion
जयंत चौधरी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई (फाइल)

    विस्तार

    भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में नवाचार को तेज करने के लिए 'कंप्लीट एआई स्टैक' बनाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि इस पहल के तहत गुप्त डेटा सेट शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे नए एआई समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट के दौरान की।

    क्या होता है 'कंप्लीट एआई स्टैक'?

    कंप्लीट एआई स्टैक का मतलब एआई से जुड़ी सभी जरूरी तकनीकों और संसाधनों का एक पूरा सिस्टम होता है। इसमें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डेटा और सेवाएं शामिल होती हैं। इसकी मदद से एआई सिस्टम को बनाया, ट्रेन किया और उपयोग में लाया जाता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल होते हैं:

    • हार्डवेयर, जैसे जीपीयू और सर्वर
    • सॉफ्टवेयर और एआई डेवलपमेंट टूल्स
    • डेटा सेट, जिनसे एआई मॉडल को ट्रेन किया जाता है
    • एआई मॉडल की ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट सिस्टम
    • एआई सिस्टम को मैनेज और मॉनिटर करने वाली सेवाएं

    इसका मुख्य उद्देश्य एआई एप्लिकेशन के डिजाइन, ट्रेनिंग, डिप्लॉयमेंट और मैनेजमेंट की पूरी प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बनाना होता है।

    रिसर्च और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध होगा गुप्त डेटा

    केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि सरकार ऐसे डेटा सेट तैयार कर रही है जिन्हें गुप्त किया जाएगा। यानी उनमें किसी भी व्यक्ति की पहचान सुरक्षित रहेगी। इन डेटा सेट को शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि वे नए एआई समाधान विकसित कर सकें और नवाचार को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा, "शिक्षा क्षेत्र में हम कंप्लीट एआई स्टैक बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसमें गुप्त डेटा सेट रिसर्च और नवाचार के लिए उपलब्ध होंगे। इससे स्टार्टअप्स को सरकार और नागरिकों के जरिए साझा किए गए डेटा का उपयोग कर नई तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा।"

    एआई सिस्टम के लिए ऑडिट ट्रेल और जवाबदेही बढ़ाने की योजना

    सरकार एआई सिस्टम को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ऑडिट ट्रेल मैकेनिज्म विकसित करने पर विचार कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि भविष्य में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी संस्थाएं एआई मॉडल का ऑडिट कर सकती हैं और उनकी ऑडिट रिपोर्ट जारी कर सकती हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि एआई सिस्टम पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं और उनका उपयोग जिम्मेदारी और निर्धारित नियमों के अनुसार हो रहा है।

    एआई विकास में PPP मॉडल और लोगों की भूमिका अहम

    भारत का एआई मिशन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि PPP में सबसे महत्वपूर्ण 'P' यानी पीपुल (लोग) हैं, जो एआई विकास के केंद्र में नागरिकों की भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि एआई से जुड़ी नीतियां बनाते समय डेटा गोपनीयता, भरोसा, डेटा सुरक्षा और रोजगार पर संभावित प्रभाव जैसी महत्वपूर्ण चिंताओं को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा, "एआई के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय होने चाहिए लेकिन नवाचार की संभावनाओं को सीमित नहीं करना चाहिए।"

    इंडियाएआई मिशन के तहत तेजी से बढ़ रही कंप्यूटिंग क्षमता

    इंडियाएआई मिशन के तहत भारत ने शुरुआत में 18,000 जीपीयू का लक्ष्य रखा था। लेकिन यह संख्या पहले ही बढ़कर 38,000 से अधिक हो चुकी है। सरकार को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक देश की कंप्यूटिंग क्षमता एक लाख जीपीयू से ज्यादा हो जाएगी। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि इस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित किया जाएगा। ताकि उच्च स्तर का शोध संभव हो सके और शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सके।

    भारत के एआई भविष्य के लिए बड़ा कदम

    सरकार की यह पहल भारत को एआई के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कंप्लीट एआई स्टैक, उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों और डेटा तक बेहतर पहुंच से देश में नए स्टार्टअप्स, शोध और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल भारत का टेक्नोलॉजी सेक्टर मजबूत होगा बल्कि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी और भारत वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।

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