31 दिसंबर से काम नहीं करेगा गूगल का एआई कोडिंग टूल: कंपनी क्यों बंद कर रही है 'जूल्स'? जानें असली वजह

कुलदीप शर्मा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीकुलदीप शर्मा
Fri, 30 Oct 2026 03:14 PM IST
सार

गूगल अपने AI कोडिंग टूल जूल्स को बंद करने जा रहा है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कंपनी ने यह फैसला लिया और अब यूजर्स को अपना काम बचाने के लिए क्या करना होगा? आइए जानते हैं।

Google to Shut Down Jules AI Coding Tool by December 31 2026 Check Shutdown Timeline and What Users Should Do
गूगल का कोडिंग टूल जूल्स - फोटो : Amar Ujala Digital

    विस्तार

    Google ने अपने AI कोडिंग टूल Jules को बंद करने का फैसला किया है। कंपनी 31 दिसंबर 2026 को इस सर्विस को पूरी तरह बंद कर देगी। इससे पहले 11 नवंबर 2026 से Jules को रीड-ओनली मोड में डाल दिया जाएगा। यानी इस तारीख के बाद यूजर्स अपने पुराने सेशन देख तो सकेंगे, लेकिन उनमें नए बदलाव नहीं कर पाएंगे। ऐसे में जो डेवलपर्स रोजाना कोडिंग से जुड़े काम के लिए Jules का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें समय रहते अपना जरूरी डेटा सेव करना होगा।

    दरअसल कंपनी अब Jules से मिली तकनीक और अनुभव को अपने दूसरे AI डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म Antigravity में शामिल करने की तैयारी कर रही है। Google का मकसद अलग-अलग AI कोडिंग टूल के बजाय ऐसा एक प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां डेवलपर्स को कई तरह की सुविधाएं एक ही जगह मिल सकें।

    दो चरणों में बंद होगी जूल्स की सर्विस

    Google ने जूल्स को अचानक बंद करने के बजाय इसके लिए एक तय समयसीमा रखी है। कंपनी के मुताबिक 11 नवंबर 2026 से यह टूल रीड-ओनली मोड में चला जाएगा। इस दौरान यूजर्स अपने पुराने कोडिंग सेशन और उनसे जुड़ी जानकारी देख सकेंगे, लेकिन कोई नया काम शुरू नहीं कर पाएंगे। इसके बाद 31 दिसंबर 2026 को यह सर्विस पूरी तरह बंद हो जाएगी। इसलिए जिन लोगों के अधूरे प्रोजेक्ट या जरूरी कोडिंग सेशन Jules पर मौजूद हैं, उन्हें नवंबर से पहले अपना काम पूरा कर लेना चाहिए।

    आखिर गूगल क्यों बंद कर रहा है जूल्स?

    गूगल ने इस फैसले के पीछे किसी तकनीकी खराबी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का जिक्र नहीं किया है। कंपनी अब अपनी AI कोडिंग सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने पर ध्यान दे रही है। गूगल के मुताबिक जूल्स के साथ किए गए प्रयोगों से उसे यह समझने में मदद मिली कि AI एजेंट किस तरह डेवलपर्स के रोजमर्रा के काम कम कर सकते हैं। अब कंपनी इसी अनुभव को Antigravity में इस्तेमाल करना चाहती है, ताकि डेवलपर्स को कोडिंग और दूसरे डेवलपमेंट टास्क के लिए अलग-अलग टूल पर निर्भर न रहना पड़े।

    जूल्स से क्या-क्या काम कर सकते थे डेवलपर्स?

    • लॉन्च:जूल्स को दिसंबर 2024 में गूगल लैब्स के एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट के तौर पर पेश किया गया था।
    • GitHub से कनेक्शन:डेवलपर्स अपने GitHub अकाउंट और कोड रिपॉजिटरी को इससे से जोड़ सकते थे।
    • कोडिंग में मदद:यह कोड की गलतियां ठीक करने, नए फीचर बनाने और सॉफ्टवेयर पैकेज अपडेट करने जैसे काम कर सकता था।
    • टेस्टिंग और पुल रिक्वेस्ट:Jules कोड के टेस्ट तैयार करने और चलाने के साथ काम पूरा होने पर GitHub पर पुल रिक्वेस्ट भी भेजता था।
    • बैकग्राउंड में काम:यह यूजर के निर्देश मिलने के बाद अपने आप काम करता रहता था। डेवलपर्स को हर समय स्क्रीन के सामने बैठकर इसकी निगरानी करने की जरूरत नहीं होती थी।

    यूजर्स अपना डेटा कैसे सुरक्षित रखें?

    गूगल यूजर्स को जूल्स से जुड़ी जानकारी डाउनलोड करने की सुविधा दे रहा है। इसमें अकाउंट सेटिंग्स, एनवायरनमेंट वेरिएबल्स, सेव की गई मेमोरी, पुराने सेशन, प्रॉम्प्ट, एक्टिविटी लॉग और कोड में किए गए बदलाव शामिल हैं। इसके लिए Jules के कमांड लाइन टूल का इस्तेमाल करना होगा। हालांकि यूजर्स को अपने असली कोड की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनका कोड, ब्रांच और पुल रिक्वेस्ट पहले से GitHub पर मौजूद हैं और जूल्स बंद होने के बाद भी वहीं सुरक्षित रहेंगे। डेटा एक्सपोर्ट करने का मकसद मुख्य रूप से वह जानकारी बचाना है, जो जूल्स के अंदर ही मौजूद थी।

    एन्टीग्रेविटी में मिलेगी जूल्स जैसी सुविधा

    गूगल अब डेवलपर्स को एन्टीग्रेविटी इस्तेमाल करने की सलाह दे रहा है। यह ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां AI एजेंट किसी काम की योजना बनाने से लेकर कोड में बदलाव करने, कमांड चलाने और नतीजों की जांच करने तक में मदद कर सकते हैं। कंपनी की योजना जूल्स की बैकग्राउंड में काम करने वाली क्षमता को भी एन्टीग्रेविटी में शामिल करने की है। हालांकि फिलहाल इसे जूल्स का सीधा विकल्प नहीं कहा जा सकता। ऐसे में यूजर्स को नए प्लेटफॉर्म पर अपने काम करने का तरीका समझने के लिए तैयार रहना होगा।