AI vs Humans: एआई नहीं कर पाया इंसानों की बराबरी, 350 इंजीनियरों को नौकरी से निकाले जाने के बाद वापस बुलाया!

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीेSuyash Pandey
Mon, 29 Jun 2026 11:06 AM IST
सार

AI Couldn't Replace Humans:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ते उत्साह के बीच फोर्ड ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, एआई आधारित क्वालिटी सिस्टम उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने के बाद कंपनी ने करीब 350 अनुभवी इंजीनियरों और क्वालिटी इंस्पेक्टर्स को दोबारा काम पर रखा है।

Ford Rehires Hundreds of Engineers After AI Quality System Underperforms
AI नहीं कर पाया इंसानों की बराबरी! - फोटो : एआई

    विस्तार

    हर तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की चर्चा है। ऐसा लग रहा था कि एआई इंसानों की नौकरी खा जाएगा, लेकिन अब कहानी पलटती दिख रही है। कार बनाने वाली मशहूर कंपनी फोर्ड ने एआई सिस्टम के उम्मीदों पर खरा न उतरने के बाद, वापस इंसानों को नौकरी पर बुलाना शुरू कर दिया है। आइए समझते हैं कि आखिर मामला क्या है और बड़ी कंपनियां एआई को लेकर अपना रुख क्यों बदल रही हैं।

    फोर्ड का एआई सिस्टम क्यों हुआ फेल?

    ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कार निर्माता कंपनी फोर्ड ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 350 अनुभवी इंजीनियरों और क्वालिटी इंस्पेक्टर्स को वापस काम पर रखा है। इनमें कंपनी के कुछ पुराने कर्मचारी और सप्लायर कंपनियों के एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं।

    दरअसल, कंपनी ने कारों की चेकिंग के लिए एआई-पावर्ड और ऑटोमेटेड क्वालिटी सिस्टम लगाए थे, लेकिन वे अच्छे नतीजे नहीं दे पाए। हैरानी की बात यह है कि टीम में इंसानों की वापसी के बाद फोर्ड को काफी फायदा हुआ है:

    • क्वालिटी में सुधार:हाल ही में जेडी पावर इनिशियल क्वालिटी सर्वे में फोर्ड मुख्यधारा के ब्रांड्स में टॉप पर पहुंच गई है।
    • खर्च में कमी:इंसानों के काम करने से गलतियां कम हुईं और कंपनी का फालतू खर्च भी बचा।

    सिर्फ फोर्ड नहीं, ये दिग्गज भी हैं परेशान

    ऐसा नहीं है कि सिर्फ फोर्ड को यह दिक्कत आई है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और उबर जैसी दिग्गज कंपनियों का नाम भी इस लिस्ट में है। उबर ने एआई पर पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन उसे उस हिसाब से कोई खास फायदा नहीं दिखा। माइक्रोसॉफ्ट ने भी ज्यादा खर्च को देखते हुए अपने कर्मचारियों से एआई का सीमित इस्तेमाल करने को कहा है।

    क्या एआई का दौर खत्म हो रहा है?

    इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। एआई बेशक एक कमाल की तकनीक है, लेकिन समस्या इसके इस्तेमाल के तरीके में है। कई कंपनियां बिना सोचे-समझे हर जगह एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। इस पर फोर्ड के वाइस प्रेसिडेंट चार्ल्स पून ने एक बहुत सटीक बात कही, "हमने गलत सोच लिया था कि सिर्फ एआई को सिस्टम में लगा देने से ही एक बेहतरीन क्वालिटी वाला प्रोडक्ट बन जाएगा। एआई एक शानदार टूल है, लेकिन यह सिर्फ उतना ही अच्छा काम करता है, जितनी अच्छी जानकारी इसे ट्रेन करने के लिए दी जाती है।"

    दाल में धनिया है एआई

    एआई के काम करने के तरीके को आप दाल में धनिया की तरह समझ सकते हैं। जैसे दाल में ऊपर से हरा धनिया डालने से उसका स्वाद बढ़ जाता है, लेकिन आप सिर्फ धनिये की दाल नहीं बना सकते।

    ठीक उसी तरह, एआई आपके काम को बेहतर और आसान बना सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से इंसानी समझ और सिस्टम की जगह नहीं ले सकता। अगर इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तभी यह फायदेमंद है।

    एआई का दूसरा पहलू

    हालांकि, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सही जगह इस्तेमाल होने पर एआई क्या कर सकता है। हाल ही में इसका एक बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला, जब एक एआई चैटबॉट ने अदालत में इंसानी वकील को हरा दिया। तीन घंटे की बहस के बाद इस एआई ने असली वकील को पछाड़कर लगभग 7,000 पाउंड (करीब 8.79 लाख रुपये) का केस जीत लिया।

    तकनीक कितनी भी एडवांस क्यों न हो जाए, उसे चलाने और सही फैसले लेने के लिए इंसानी दिमाग और अनुभव की जरूरत हमेशा रहेगी। असली कामयाबी एआई और इंसान के सही तालमेल में ही छिपी है।

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