Internet: यूरोपियन यूनियन का मेटा और टिकटॉक पर बड़ा एक्शन, डिजिटल पारदर्शिता कानून तोड़ने का आरोप
यूरोपीय संघ ने मेटा और टिकटॉक पर डिजिटल सर्विसेज एक्ट के पारदर्शिता नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। जांच में पाया गया कि दोनों कंपनियों ने डेटा एक्सेस और कंटेंट रिपोर्टिंग शर्तों का पालन नहीं किया। अरबों डॉलर का जुर्माना लग सकता है।

विस्तार
यूरोपीय संघ (EU) ने सोशल मीडिया दिग्गज कंपनियों मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी) और टिकटॉक पर पारदर्शिता नियमों के उल्लंघन (ट्रांसपेरेंसी रूल्स वायलेशन) का आरोप लगाया है। यह कदम यूरोपियन यूनियन की डिजिटल सर्विसेज एक्ट (डिजिटल सर्विसेज एक्ट– DSA) के तहत की गई जांच के बाद उठाया गया है। अगर दोनों कंपनियां दोषी पाई गईं, तो उन पर अरबों डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यूरोपियन यूनियन ने साल 2024 में मेटा और टिकटॉक के खिलाफ एक विस्तृत जांच शुरू की थी। यह जांच यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के अंतर्गत की गई, जो इंटरनेट यूजर्स की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। DSA का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार बनाना है ताकि यूजर्स हानिकारक या अवैध कंटेंट (जैसे नफरत फैलाने वाली बातें, आतंकवादी सामग्री या फेक न्यूज) की रिपोर्ट आसानी से कर सकें, बच्चों को लक्षित करने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जा सके और नकली या असुरक्षित उत्पादों को चिन्हित करना आसान हो।
जांच में क्या पाया गया?
यूरोपियन यूनियन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा और टिकटॉक दोनों ने कई पारदर्शिता मानकों का उल्लंघन किया। मेटा के प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यूजर्स के लिए अवैध कंटेंट रिपोर्ट करने या फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया जटिल और अस्पष्ट पाई गई। दोनों कंपनियों ने शोधकर्ताओं को प्लेटफॉर्म डेटा तक पर्याप्त पहुंच नहीं दी, जबकि DSA के तहत यह पारदर्शिता की एक आवश्यक शर्त है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि दोनों प्लेटफॉर्म्स ने “डार्क पैटर्न्स” यानी भ्रामक इंटरफेस डिजाइन का इस्तेमाल किया जिससे यूजर्स हानिकारक सामग्री रिपोर्ट करने में भ्रमित या हतोत्साहित हुए। यूरोपियन यूनियन आयोग के अनुसार, ये डिजाइन “भ्रमित करने वाले और अप्रभावी” हैं और इससे प्लेटफॉर्म्स पर रिपोर्टिंग प्रक्रिया कमजोर हो गई है।
यूरोपियन यूनियन अधिकारियों की प्रतिक्रिया
यूरोपियन यूनियन की कार्यकारी उपाध्यक्ष हेन्ना विरकुन्नेन ने कहा, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्लेटफॉर्म्स अपने यूजर्स और समाज के प्रति जवाबदेह रहें। हमारे लोकतंत्र भरोसे पर टिका है। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म्स को पारदर्शी होना होगा और अपनी प्रणालियों को जांच के लिए खोलना होगा। DSA यह सुनिश्चित करता है कि यह जिम्मेदारी अब विकल्प नहीं, बल्कि एक कानूनी कर्तव्य है।”
मेटा और टिकटॉक ने क्या कहा?
मेटा के प्रवक्ता बेन वाल्टर्स ने कहा कि कंपनी यूरोपियन यूनियन के निष्कर्षों से असहमत है, लेकिन वह सहयोग जारी रखेगी। “हमने DSA लागू होने के बाद अपनी रिपोर्टिंग प्रक्रिया, अपील प्रणाली और डेटा एक्सेस टूल्स में कई सुधार किए हैं और हमें विश्वास है कि ये सभी यूरोपियन यूनियन कानून के अनुरूप हैं।” वहीं, टिकटॉक ने यूरोपियन यूनियन के निष्कर्षों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि DSA की पारदर्शिता शर्तें यूरोपीय संघ के GDPR प्राइवेसी कानून से टकरा रही हैं। टिकटॉक के प्रवक्ता पाओलो जेनियो ने कहा — “अगर दोनों कानूनों का एक साथ पालन करना संभव नहीं है, तो नियामकों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन नियमों को कैसे संतुलित किया जाए।”
क्या होगा अगला कदम?
मेटा और टिकटॉक अब यूरोपियन यूनियन आयोग के सामने अपने जवाब दाखिल कर सकते हैं। अगर आयोग को जवाब संतोषजनक नहीं लगे तो दोनों कंपनियों पर उनके वैश्विक वार्षिक मुनाफे का 6 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका मतलब है कि उन्हें अरबों डॉलर का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
क्यों है यह मामला अहम?
यह मामला इस बात का संकेत है कि यूरोपीय संघ अब बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स पर कड़ा नियंत्रण चाहता है। DSA के जरिए यूरोपियन यूनियन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सोशल मीडिया कंपनियां केवल यूजर्स से मुनाफा न कमाएं, बल्कि उनकी सुरक्षा, गोपनीयता और अधिकारों की रक्षा भी करें।
यूरोपियन यूनियन का यह कदम बताता है कि टेक कंपनियों के लिए अब पारदर्शिता और जवाबदेही से बचना आसान नहीं होगा। डिजिटल सर्विसेज एक्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल युग में यूजर्स की सुरक्षा केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व भी है।