Meta: मेटा के कॉपीराइट स्ट्राइक सिस्टम पर उठे सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा- फर्जी खातों को कैसे मिला एक्सेस?

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 12 Aug 2026 03:56 PM IST
सार

इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कंटेंट चोरी रोकने वाला मेटा का 'राइट्स मैनेजर' टूल विवादों में आ गया है। यह मामला फर्जी अकाउंट्स द्वारा असली क्रिएटर्स पर कॉपीराइट स्ट्राइक करने और ब्लैकमेल करने से जुड़ा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा से सख्त सवाल करते हुए पूछा है कि फर्जी खातों को यह टूल कैसे मिल रहा है।

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फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक पर कोर्ट ने मेटा से किए सवाल - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    सोशल मीडिया पर कंटेंट चोरी होने से बचाने के लिए मेटा का राइट्स मैनेजर एक अहम टूल माना जाता है। यह क्रिएटर्स और कॉपीराइट धारकों को उनके ओरिजिनल कंटेंट की पहचान करने और बिना अनुमति दोबारा अपलोड किए गए कंटेंट पर कार्रवाई करने में मदद करता है। लेकिन अब इसी टूल की पहुंच और इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा से जवाब मांगा है।

    मामला कंटेंट क्रिएटर और बिजनेस कोच मोहित कुमार की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके अकाउंट के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक का इस्तेमाल किया गया और बाद में उनसे पैसे वसूलने की कोशिश की गई।बड़े क्रिएटर को राइट्स मैनेजर क्यों नहीं?

    • मोहित कुमार की ओर से कोर्ट में पेश वकील ने दावा किया कि बड़ी संख्या में फॉलोअर्स और व्यूज वाले क्रिएटर्स को भी राइट्स मैनेजरका एक्सेस नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुमार ने इस टूल के लिए तीन बार आवेदन किया, लेकिन हर बार उनका अनुरोध खारिज कर दिया गया। वहीं, उनका आरोप था कि कथित स्कैमर्स इसी सिस्टम का इस्तेमाल वास्तविक क्रिएटर्स के खिलाफ कॉपीराइट स्ट्राइक जारी करने के लिए कर रहे हैं।
    • इस पर जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने मेटा से उसकी नीति, गाइडलाइंस और राइट्स मैनेजर की पात्रता के नियम अदालत के सामने रखने को कहा है। मेटा की ओर से भी कहा गया कि कंपनी इन शर्तों और कुमार को एक्सेस नहीं देने के आधार को रिकॉर्ड पर रखेगी।

    8 करोड़ से घटकर 3 लाख रह गए व्यूज?

    • कोर्ट को बताया गया कि कथित कॉपीराइट स्ट्राइक शुरू होने से पहले मोहित कुमार के कंटेंट को हर महीने करीब 7-8 करोड़ व्यूज मिल रहे थे। उनके मुताबिक, बाद में यह आंकड़ा घटकर लगभग 3 लाख व्यूज प्रति माह रह गया।
    • कुमार के वकील ने यह भी समझाया कि राइट्स मैनेजर किस तरह काम करता है।
    • क्रिएटर के ओरिजिनल कंटेंट को सिस्टम में पहचानने के बाद अगर कोई दूसरा व्यक्ति वही या मिलता-जुलता कंटेंट अपलोड करता है, तो यह टूल उसका पता लगा सकता है। इसके बाद अधिकार रखने वाला व्यक्ति कंटेंट को ब्लॉक करने या कॉपीराइट स्ट्राइक लगाने जैसी कार्रवाई कर सकता है।

    मेटा ने क्या कहा?

    • मेटा की ओर से अदालत में कहा गया कि राइट्स मैनेजर का एक्सेस वेरिफिकेशन प्रक्रिया के अधीन है। कंपनी के अनुसार, किसी व्यक्ति के कंटेंट पर अधिकार का दावा सही है या किसी अन्य व्यक्ति का दावा सही है, यह तुरंत तय करना हमेशा संभव नहीं होता।
    • हालांकि, कोर्ट ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाया। सुनवाई के दौरान जस्टिस भंभानी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन क्रिएटर्स की बड़ी फॉलोइंग और व्यूअरशिप है, उन्हें इस तरह के एंटी-प्लेजरिज्म टूल का एक्सेस मिलना चाहिए।
    • अदालत ने मौजूदा स्थिति पर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए इसकी तुलना “घर के मालिक को नहीं, चोर को चाबी देने” जैसी स्थिति से की।

    पहले की स्ट्राइक भी हुईं रिवर्स

    • कॉपीराइट स्ट्राइक के मामले में मेटा ने बताया कि तकनीकी जांच के बाद कुमार के अकाउंट पर लगाई गई स्ट्राइक को हटा दिया गया है। कंपनी ने यह भी कहा कि उनका अकाउंट कभी सस्पेंड नहीं किया गया था।
    • अब अदालत इस मामले में मेटा की नीतियों और राइट्स मैनेजर तक पहुंच के नियमों को देखेगी। साथ ही, कोर्ट एक दूसरे मामले के संदर्भ में यह भी विचार कर रही है कि कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर अकाउंट सस्पेंड करना आईटी एक्ट की धारा 79 और सुप्रीम कोर्ट के श्रेया सिंघल फैसले से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।

    मेटा के खिलाफ ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही

    • यह मामला अकेला नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट में मेटा के कॉपीराइट स्ट्राइक सिस्टम के कथित दुरुपयोग से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। कंटेंट क्रिएटर नितिन जोशी ने एक PIL में फर्जी इंस्टाग्राम कॉपीराइट स्ट्राइक के जरिए कथित संगठित वसूली के रैकेट का आरोप लगाया है। इसके अलावा क्रिएटर्स मोहम्मद नवाज शेख और प्रतीक सहनी से जुड़े मामले भी अदालत के सामने हैं।
    • ऐसे में राइट्स मैनेजर की पात्रता, कॉपीराइट स्ट्राइक की सत्यता और शिकायतों की जांच की प्रक्रिया पर अब अदालत की नजर है। इस सुनवाई से यह सवाल भी अहम हो गया है कि कंटेंट की सुरक्षा के लिए बनाया गया सिस्टम कहीं खुद क्रिएटर्स के लिए परेशानी का कारण तो नहीं बन रहा।
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