चीन ने बनाया धरती जैसा एआई समाज: इंसान के व्यवहार को समझने के लिए आभासी तंत्र में एक अरब एआई एजेंट! मकसद क्या?

चीन के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा एआई आधारित आभासी तंत्र (सिमुलेशन सिस्टम) विकसित किया है, जो व्यापक स्तर पर इंसानी समाज व उसके व्यवहार को समझने के लिए अध्ययन कर रहा है। इसमें एक अरब से ज्यादा वर्चुअल इंसानी एजेंटों को लगाया गया है, जो वास्तविक इंसान के व्यवहार के विविध रूपों को समझने की कोशिश करेंगे।
इन एआई एजेंट्स को केवल सामान्य कंप्यूटर बॉट की तरह नहीं बनाया गया है, बल्कि इनमें व्यक्तित्व, स्मृति, विश्वास और इंसानों जैसी इच्छाओं व सामाजिक व्यवहार को दर्शाने की क्षमता शामिल है। शोधकर्ताओं ने इस प्रोजेक्ट को "लाइट सोसाइटी" नाम दिया है। इससे जुड़ा शोधपत्र "मॉडलिंग अर्थ स्केल ह्यूमन-लाइक सोसाइटीज विथ वन बिलियन एजेंट्स" शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इसे इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन मशीन लर्निंग (आईसीएमएल) में प्रस्तुत किया गया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इन प्रयोगों में सिस्टम ने वास्तविक सामाजिक घटनाओं और मानव व्यवहार की विविधता को काफी हद तक समझने की क्षमता दिखाई।
एआई एजेंटों को वास्तविक दुनिया का डाटा भी दिया गया
शोधकर्ताओं ने इन वर्चुअल एजेंट्स को वास्तविक दुनिया की जनसांख्यिकीय और सामाजिक जानकारी से जोड़ने के लिए वर्ल्ड वैल्यूड सर्वे जैसे वास्तविक डाटा स्रोतों का इस्तेमाल किया। इसका उद्देश्य ऐसे एआई एजेंट तैयार करना था जो सभी एक जैसे व्यवहार न करें, बल्कि वास्तविक समाज की तरह अलग-अलग विचार, विश्वास और सामाजिक व्यवहार प्रदर्शित करें। यानी आभासी तंत्र में मौजूद हर व्यक्ति केवल एक बॉट नहीं है, बल्कि उसके व्यवहार को सामाजिक और व्यक्तिगत विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग तरीके से मॉडल किया जा सकता है।
बड़े भाषाई तंत्र के साथ छोटे और ज्यादा तेज एआई मॉडल्स का इस्तेमाल
अब तक इस्तेमाल होने वाले एजेंट आधारित मॉडल में बड़ी संख्या में लोगों के व्यवहार को समझना करना मुश्किल था। इसकी एक वजह यह थी कि इन मॉडलों में लोगों के व्यवहार को अक्सर सीमित और पहले से तय नियमों के आधार पर दिखाया जाता था लेकिन लाइट सोसायटी में शोधकर्ताओं ने बड़े भाषाई तंत्र के साथ छोटे और ज्यादा तेज एआई मॉडल्स का इस्तेमाल किया है। इसे "मिक्सचर ऑफ मॉडल्स" तकनीक बताया गया है। इस तरीके से बड़ी संख्या में एआई एजेंट्स को एक साथ चलाना संभव हुआ और शोधकर्ताओं के मुताबिक उन्होंने एक अरब से ज्यादा स्वायत्त एजेंटों वाला आभासी समाज तैयार किया।
मेटा ने नया एआई मॉडल किया लॉन्च, जुकरबर्ग ने की ओपन-सोर्स की वकालत
मेटा प्लेटफॉर्म्स के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने सोमवार को म्यूज ग्लिमर नाम का नया ओपन-वेट एआई मॉडल पेश किया। उन्होंने चीनी प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबले लिए अमेरिका में ओपन-सोर्स एआई पर बाधाएं कम करने की मांग की। यह नया मॉडल अन्य प्रतिस्पर्धियों से छोटा है और एकल ग्राफिक्स कार्ड वाले मैक या पीसी पर आसानी से चल सकता है। द फ्यूचर इज फॉर एवरीवन शीर्षक वाले 14 पन्नों के निबंध में जुकरबर्ग ने एआई को कुछ ही हाथों में रखने के बजाय सबके लिए सुलभ बनाने का समर्थन किया।
एआई की दुनिया में पैदा किए गए असल मानवीय हालात
शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम को अलग-अलग सामाजिक प्रयोगों में इस्तेमाल किया। इनमें भरोसा और बड़े पैमाने पर किसी विचार या सूचना के समाज में फैलने जैसी परिस्थितियां शामिल थीं। इस दौरान यह देखने की कोशिश की गई कि अलग-अलग एआई एजेंट एक-दूसरे के साथ कैसे व्यवहार करते हैं, सूचना कैसे फैलती है और समय के साथ पूरा समाज किस तरह बदलता है। कोई खबर या अफवाह समाज में कितनी तेजी से फैल सकती है।