धरती पर कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर बढ़ा, हुई सारी हदें पार, जीना होगा मुहाल

हमें जल्द से जल्द धरती की पर्यावर्णीय वास्तविकता को समझकर पीपीएम 400 को अलविदा कहना होगा। हाल ही में प्रकाशित जर्नल नेचर की एक रिसर्च से यह बात सामने आई है कि धरती पर कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) का स्तर सामान्य से बहुत अधिक बड़ चुका है।
यदि जल्द ही धरती की पर्यावर्णीय वास्तविकताओं को नही समझा गया तो विनाश निश्चित है। जर्नल नेचर ने अपनी रिसर्च के दौरान पाया कि पिछले दो सालों में धरती के बाहरी आवरण में पीपीएम 400 (एक प्रकार की नाइट्रोजन गैस) का स्तर सामान्य मात्रा से कई गुना बढ़ गया है। जिसकी वजह से हम सभी को भविष्य में भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना कि पीपीएम 400 नाइट्रोजन गैस की मात्रा धरती पर मनुष्यों, फसलों, जानवरों आदि सभी के लिए खतरनाक है और मौसम में हो रहे सभी प्रकार के बदलावों का भी यही कारण है।यह धरती के पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है क्योंकि यह आने वाले समय में धरती के मौसम चक्र को पूरी तरह से खत्म कर देगी और धरती पर (CO2) के स्तर को तेजी से बढ़ाएगी। जिससे धरती पर अब गर्मीयां और लम्बी हुआ करेंगी।
तबाही का नाम हर्टबर्न

आमतौर पर मई के महीने में ही कार्बन डाई ऑक्सइड का स्तर अधिकतम रहता है और सितंबर के महीने में इसका न्यूनतम स्तर रहता है पर इन दिनों कार्बन डाई ऑक्सइड का स्तर पूरे वर्ष एक समान रहने और इसमे निरंतर वृध्दि होने की वजह से ही धरती पर जगह-जगह तेज बारिश, सुखा, तूफान, आंधी की घटना बार-बार हो रही है और यही कारण है कि धरती पर समुद्री जल का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
धरती के मौसम हो रहे इन बदलावों को नासा के वैज्ञानिकों ने "हर्टबर्न" (दिल जलना) नाम दिया है। साल 2015 में वैज्ञानिकों द्वारा co2 के स्तर में सबसे अधिक वृध्दि दर्ज कर बताया था, कि धरती पर (CO2) की मात्रा साल-दर-साल दो गुनी रफ्तार से बढ़ रही है।
इस साल पीपीएम 402.59 दर्ज किया गया है। जो पिछले साल के मुकाबले बहुत अधिक मात्रा में है। जिसके लिए वैज्ञानिकों द्वारा पहले ही चेतावनी दी थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि पीपीएम की 402.59 की मात्रा सामान्य मात्रा से 400 से बहुत अधिक है जो भविष्य में हम सभी के विनाश का कारण सबित होगा।