BharOS Vs Android: क्या है मोबाइल ओएस BharOS? एंड्रॉयड से कैसे है अलग? पांच प्वाइंट में जानें सबकुछ
BharOS: इस स्वदेशी ओएस का अनावरण उस समय हुआ जब गूगल को हाल ही में भारत में अपने Android OS पर कानूनी हार का सामना करना पड़ा। इसने भरोस को लेकर उत्सुकता और सवालों की संख्या को और बढ़ा दिया है।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले हफ्ते ही BharOS इंडिया का एक सफल परीक्षण किया है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने भारत में आत्मनिर्भर और मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे के पीएम मोदी के दृष्टिकोण की दिशा में एक कदम के रूप में BharOS की प्रशंसा की। अब स्वदेशी आत्मनिर्भर मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS के बारे में चर्चा तेज हो गई है। IIT मद्रास द्वारा विकसित इस मोबाइल ओएस को गूगल के एंड्रॉयड का प्रतिद्वंद्वी भी कहा जा रहा है। इस स्वदेशी ओएस का अनावरण उस समय हुआ जब गूगल को हाल ही में भारत में अपने Android OS पर कानूनी हार का सामना करना पड़ा। इसने भरोस को लेकर उत्सुकता और सवालों की संख्या को और बढ़ा दिया है। इनमें से कुछ सवालों के जवाब हम यहां देने वाले हैं। चलिए समझने की कोशिश करते हैं BharOS क्या है और यह मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम Android से कैसे अलग है।
BharOS जिसे 'भरोस' भी कहा जाता है, एक स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है। साफ शब्दों में कहें तो भरोस एंड्रॉयड के जैसा ही एक लिनक्स-कर्नेल-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम है, लेकिन कुछ अंतरों के साथ। एंड्रॉयड के विपरीत, यह किसी भी एप के साथ पहले से लोड नहीं होता है, जिससे यूजर्स को अपनी पसंद के एप को चुनने और डाउनलोड करने की आजादी मिलती है। यानी इस मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में यूजर्स को उनकी जरूरतों के अनुरूप एप चुनने और उपयोग करने के लिए अधिक स्वतंत्रता, नियंत्रण और लचीलापन मिलता है।
इस मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के इनक्यूबेटेड फर्म द्वारा विकसित किया गया है। इस सॉफ्टवेयर को कमर्शियल ऑफ-द-शेल्फ हैंडसेट पर इंस्टॉल किया जा सकता है। इस ओएस की खास बात यह है कि यह हाईटेक सिक्योरिटी और प्राइवेसी के साथ आता है। भरोस का लक्ष्य देश में 100 करोड़ मोबाइल यूजर्स बनाना है।
हालांकि, BharOS भी Linux Kernel पर आधारित है, यह Android के समान है लेकिन कुछ बदलावों के साथ जैसे यह प्रीलोडेड एप्स के साथ नहीं आता है। भरोस यूजर्स को किसी एप का उपयोग करने के लिए मजबूर करने के बजाय उन एप्स को चुनने की सुविधा देता है जो वे चाहते हैं। भरोस संगठन-विशिष्ट प्राइवेट एप स्टोर सर्विस (PASS) से विश्वसनीय एप्स को ही एक्सेस देता है।
दरअसल, PASS उन एप्स को ही क्यूरेटेड लिस्ट तक पहुंचने की अनुमति देता है, जिन्हें पूरी तरह से जांचा गया है और ऑर्गेनाइजेशन के कुछ सुरक्षा और गोपनीयता स्टैंडर्ड को पूरा किया है। इसका मतलब है कि यूजर्स आश्वस्त हो सकते हैं कि वे अपने डिवाइस में जो एप इंस्टॉल कर रहे हैं वे उपयोग करने के लिए सुरक्षित हैं और वह उन एप पर भरोसा कर सकते हैं।