नासा ने Artemis-2 मिशन की लॉन्चिंग टाली: टेस्ट में लीक हुआ हाइड्रोजन फ्यूल, अब मार्च में होगा लॉन्च

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Thu, 05 Feb 2026 08:01 AM IST
सार

NASA का बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस-2 मिशन एक बार फिर तकनीकी कारणों से वजह से टल गया है। इसकी वजह रॉकेट के फ्यूल सिस्टम से हाइड्रोजन के रिसाव को बताया जा रहा है। स्पेस एजेंसी ने अब लॉन्च की नई टाइमलाइन जारी की है।

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नासा स्पेसक्राफ्ट (सांकेतिक) - फोटो : AI

    विस्तार

    फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर में सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा था। नासा की टीम 49 घंटे लंबे लॉन्च काउंटडाउन का रिहर्सल कर रही थी। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि फरवरी की शुरुआत में ही चार अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सैर पर भेज दिया जाएगा। लेकिन जैसे ही रॉकेट में ईंधन भरने की प्रक्रिया शुरू हुई, लिक्विड हाइड्रोजन ने अपना पुराना खेल दिखाना शुरू कर दिया। जांच में पता चला कि ईंधन भरने वाली प्रणाली में एक बार फिर रिसाव हो रहा है। इसके बाद नासा को आनन-फानन में लॉन्चिंग को टालने का फैसला लेना पड़ा।

    हाइड्रोजन फ्यूल बना मुसीबत

    ब्रह्मांड का सबसे छोटा तत्व हाइड्रोजन नासा के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। यह इतना छोटा होता है कि मामूली से मामूली खरोंच या ढीले पड़ चुके सील से भी आसानी से बाहर निकल जाता है। नासा के आर्टेमिस-2 मिशन मैनेजमेंट टीम के अध्यक्ष जॉन हनीकट्ट ने स्वीकार किया कि इस लीक ने उन्हें हैरान कर दिया है। टीम ने रॉकेट के हर एक वॉल्व और सील की गहन जांच की थी, लेकिन रॉकेट और ग्राउंड सिस्टम के बीच का यह तालमेल इतना जटिल है कि छोटी सी भी चूक पूरे मिशन को खतरे में डाल सकती है।

    आर्टेमिस-1 की यादें हुईं ताजा

    यह पहली बार नहीं है जब हाइड्रोजन ने नासा का रास्ता रोका हो। साल 2022 में जब बिना इंसान वाला 'आर्टेमिस-1' मिशन लॉन्च होना था, तब भी बार-बार होने वाले हाइड्रोजन रिसाव ने कई महीनों तक मिशन को लटकाए रखा था। फ्लोरिडा की नमी और बार-बार बदलते तापमान ने हाइड्रोजन सिस्टम के लिए चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। हालांकि पिछला मिशन सफल रहा था, लेकिन इस बार मामला अलग है क्योंकि रॉकेट के अंदर इंसान सवार होंगे।

    इतनी दिक्कतों के बावजूद हाइड्रोजन ही क्यों?

    अब सवाल उठता है कि जब हाइड्रोजन इतनी मुसीबत खड़ी करता है, तो नासा इसका इस्तेमाल छोड़ क्यों नहीं देता? इसका जवाब इसकी अद्भुत क्षमता में छिपा है। स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट में लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है। यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली और प्रभावी ईंधन है। यह ईंधन जलने पर इतनी जबरदस्त ताकत (थ्रस्ट) पैदा करता है कि भारी-भरकम रॉकेट को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर धकेल कर चांद तक पहुंचा सके। सरल भाषा में कहें तो, कम ईंधन में ज्यादा माइलेज और बेजोड़ ताकत के लिए हाइड्रोजन ही एकमात्र विकल्प है।

    क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?

    आर्टेमिस II नासा का वह मिशन है जिसमें पहली बार चार अंतरिक्ष यात्री चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस लौटेंगे। अब मिशन को मार्च में लॉन्च करने की तैयारी चल रही है। नासा के लिए अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है। मानवरहित मिशन में जहां थोड़े बहुत जोखिम की गुंजाइश होती है, वहीं मानव मिशन में वैज्ञानिक 1% भी रिस्क नहीं लेना चाहते। ईंधन प्रणाली में जरा सा भी संदेह होने का मतलब है कि मिशन को तब तक रोका जाए जब तक समस्या जड़ से खत्म न हो जाए।

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