Apple Pay: भारत आ रहा है एपल पे, अक्टूबर में हो सकता है लॉन्च; लेकिन शुरुआत में नहीं मिलेगा UPI का सपोर्ट

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 12 Aug 2026 10:41 AM IST
सार

Apple Pay के भारत में लॉन्च का इंतजार खत्म होने वाला है। iPhone यूजर्स जल्द ही शानदार टैप-एंड-पे फीचर का मजा ले सकेंगे, लेकिन एक बड़ी सर्विस की कमी शुरुआत में आपके डिजिटल पेमेंट के अनुभव को थोड़ा फीका कर सकती है। जानिए क्या है एपल की पूरी योजना।

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Apple Pay - फोटो : X

    विस्तार

    लंबे समय से भारत में एपल पे (Apple Pay) के लॉन्च की अटकलें लगाई जा रही थीं, और अब ऐसा लगता है कि यह इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। टेक इंडस्ट्री की ताजा हलचलों के मुताबिक, टेक दिग्गज एपल (Apple) इस साल अक्टूबर में अपनी बहुप्रतीक्षित पेमेंट सर्विस भारत में पेश कर सकती है। हालांकि, शुरुआत में एपल पे में भारत के सबसे लोकप्रिय और घर-घर में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल पेमेंट सिस्टम यानी यूपीआई (UPI) का सपोर्ट शायद देखने को नहीं मिलेगा।

    एपल
    एपल - फोटो : X

    बैंकों से चल रही है बातचीत

    शुरुआती चरण में, एपल पे मुख्य रूप से वीजा और मास्टरकार्ड के क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर निर्भर करेगा। इसका सीधा मतलब है कि आईफोन और एपल वॉच का इस्तेमाल करने वाले ग्राहक दुकानों पर एनएफसी-सक्षम (NFC) मशीनों पर सिर्फ अपना डिवाइस टैप करके आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। इस सर्विस को सुचारू रूप से शुरू करने के लिए कंपनी ने देश के बड़े निजी बैंकों जैसे एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक के साथ बातचीत को लगभग अंतिम रूप दे दिया है।

    शुरुआत में नहीं मिलेगा यूपीआई का सपोर्ट
    शुरुआत में नहीं मिलेगा यूपीआई का सपोर्ट - फोटो : Adobe Stock

    शुरुआत में UPI क्यों नहीं मिलेगा?

    • अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस देश में यूपीआई डिजिटल लेनदेन की रीढ़ बन चुका है, वहां एपल बिना इसके बाजार में क्यों उतर रहा है? दरअसल, इसके पीछे कुछ गहरी तकनीकी और व्यावसायिक पेचीदगियां हैं। सबसे बड़ी बाधा ऑथेंटिकेशन को लेकर है।
    • एपल अपने पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए 'फेस आईडी' या 'टच आईडी' को ही सबसे अहम मानता है। दूसरी तरफ, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की पहचान संबंधी आवश्यकताएं देश के अपने बुनियादी ढांचे पर आधारित हैं। इन दोनों अलग-अलग सिक्योरिटी सिस्टम्स के बीच तकनीकी तालमेल बैठाने में अभी वक्त लग रहा है।
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