Apple: एपल ने एंटीट्रस्ट नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लग सकता है कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा जुर्माना

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Thu, 27 Nov 2025 06:40 PM IST
सार

एपल ने भारत में लागू हुए नए प्रतिस्पर्धा कानून के जुर्माना नियमों को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अगर जुर्माना कंपनी के वैश्विक टर्नओवर के आधार पर तय किया गया, तो उसे 38 अरब डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है।

Apple is challenging Indias new antitrust penalty law
भारत के प्रतिस्पर्धा कानून के जुर्माना नियमों पर एपल ने किया दिल्ली हाईकोर्ट का रुख (दिल्ली हाईकोर्ट- सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    एपल ने भारत में लागू हुए नए प्रतिस्पर्धा कानून के जुर्माना नियमों को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि अगर जुर्माना उसके वैश्विक टर्नओवर के आधार पर तय किया गया, तो उसे 38 अरब डॉलर (लगभग 3.17 लाख करोड़ रुपये) तक का जुर्माना लग सकता है। जो कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े जुर्मानों में से एक हो सकता है। एपल ने यह संविधानिक याचिका 25 नवंबर को दायर की है।

    एपल ने उठाए सवाल कहा- 'नियम मनमाने और असंवैधानिक'

    एपल ने 2024 में प्रतिस्पर्धा अधिनियम में किए गए संशोधनों पर सवाल उठाते हुए इन्हें "मनमाना, असंवैधानिक, असंगत और अन्यायपूर्ण" बताया है। पहले भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) भारत में अर्जित राजस्व के आधार पर ही जुर्माना लगाती थी, लेकिन नए नियमों के अनुसार वैश्विक राजस्व को भी आधार बनाया जा सकता है।

    एप स्टोर नीतियों पर CCI की जांच

    यह विवाद 2022 में शुरू हुई एंटीट्रस्ट जांच से जुड़ा है। मैच ग्रुप्स और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने एपल पर आरोप लगाया था कि कंपनी डेवलपर्स पर अनिवार्य इन-एप पर्चेज (IAP) सिस्टम थोपती है। भुगतान पर 30% तक कमीशन वसूलती है। एप्स में वैकल्पिक पेमेंट तरीकों की जानकारी देने नहीं देती और अपनी एंटी-स्टीयरिंग पॉलिसी के तहत बाहरी पेमेंट लिंक लगाने पर रोक लगाती है। CCI के अनुसार, ये कदम डेवलपर्स की स्वतंत्रता सीमित करते हैं, बाजार में प्रतिस्पर्धा कम करते हैं और तकनीकी नवाचार को भी प्रभावित करते हैं। जांच में यह भी सामने आया कि भारत में आईओएस यूजर्स तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता एप स्टोर ही है, जिससे एपल की स्थिति बाजार में बेहद मजबूत हो जाती है। हालांकि, एपल का कहना है कि भारत में उसका बाजार शेयर एंड्रॉयड की तुलना में बहुत कम है, भले ही पिछले पांच वर्षों में यूजर बेस चार गुना क्यों न बढ़ा हो।

    एपल का तर्क- 'वैश्विक कारोबारके आधार पर जुर्माना अवैध'

    एपल ने कोर्ट में कहा कि संशोधन को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। CCI को वैश्विक राजस्व देखने का अधिकार नहीं है। किसी एक प्रोडक्ट को लेकर की गई गलती पर पूरे वैश्विक कारोबार पर जुर्माना लगाना अनुचित है। कंपनी की तुलना वाली दलील भी दिलचस्प रही। यह ऐसा है जैसे किसी खिलौना विक्रेता की एक प्रोडक्ट लाइन में समस्या हो, और पूरे बिजनेस पर जुर्माना लगा दिया जाए।

    3 दिसंबर को होगी सुनवाई

    मामले की अगली सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच 3 दिसंबर को करेगी। कानूनी विशेषज्ञों की राय में एपल की चुनौती आसान नहीं है। प्रतिस्पर्धा कानून विशेषज्ञ गौतम शाही के मुताबिक, संशोधित कानून स्पष्ट रूप से ग्लोबल टर्नओवर को आधार बनाने की अनुमति देता है, इसलिए इसे कोर्ट में टिकाना मुश्किल हो सकता है।

    CCI ने पहली बार नए नियमों का इस्तेमाल भी शुरू किया

    दिलचस्प बात यह है कि एपल ने याचिका ऐसे समय दायर की, जब CCI ने 10 नवंबर को एक पुराने मामले में पहली बार नए पेनल्टी फ्रेमवर्क का उपयोग कर 10 साल पुराने उल्लंघन पर भी नया नियम लागू करने की प्रक्रिया शुरू की। मैच ग्रुप का कहना है कि ग्लोबल टर्नओवर पर आधारित जुर्माना दोहराए जाने वाले उल्लंघनों पर मजबूत रोक लगाने में मदद करेगा। फिलहाल, एपल के खिलाफ इस मामले में CCI ने कोई अंतिम आदेश या जुर्माना जारी नहीं किया है।

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