AirFibre से कितना अलग है Starlink: क्या आपके फोन में डॉयरेक्ट चलेगा इंटरनेट? दोनों के अंतर को समझें

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Thu, 13 Mar 2025 05:33 PM IST
सार

जब देश में Jio और Airtel पहले से ही Airfibre के जरिए वायरलेस ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस दे रहीं है, तो फिर स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट की जरूरत क्यों पड़ी? जानिए एयफाइबर से कैसे अलग है स्टारलिंक की तकनीक।

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स्टारलिंक इंटरनेट - फोटो : Starlink

    विस्तार

    अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क (Elon Musk) की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस Starlink की चर्चा आज हर जुबां पर है। फिलहाल स्टारलिंक को भारत में ऑपरेट करने के लिए सरकार से अनुमति नहीं मिली है, लेकिन कंपनी ने टेलीकॉम सेक्टर की दो बड़ी कंपनियों, रिलायंस जियो और एयरटेल के साथ करार कर लिया है। अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार से अनुमति मिलते ही Starlink एयरटेल और जियो की मदद से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा मुहैया कराना शुरू करेगी। Starlink के बारे में कहा जा रहा है कि इसमें सीधे सैटेलाइट से इंटरनेट मिलेगी जिसके चलते फाइबर केबल बिछाने या टावर लगाने की जरूरत ही नहीं होगी। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तकनीक हमारे इंटरनेट उपयोग करने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव ला सकती है।

    लेकिन सवाल यह उठता है कि जब देश में Jio और Airtel तो पहले से ही Airfibre के जरिए वायरलेस ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस दे रहीं है, तो फिर सैटेलाइट इंटरनेट की जरूरत क्यों पड़ी? इस सवाल का जवाब जानने के लिए पहले आपको सैटेलाइट इंटरनेट में काम करने वाली तकनीक को समझना होगा और यह भी जानना होगा कि दोनों टेक्नोलॉजी एक दूसरे से कैसे अलग हैं।

    स्टारलिंक को नहीं पड़ती टावर की जरूरत
    स्टारलिंक को नहीं पड़ती टावर की जरूरत - फोटो : स्टारलिंक

    AirFibre कैसे करता है काम?

    जियो और एयरटेल द्वारा प्रदान किया जाने वाला AirFibre सर्विस और कुछ नहीं बल्कि वायरलेस इंटरनेट टेक्नोलॉजी है। इसमें एडवांस WiFi 6 टेक्नोलॉजी के जरिए हाई-स्पीड 5G इंटरनेट मिलती है। इसमें आपके घर में फाइबर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन AirFibre डिवाइस नजदीकी टावर से इंटरनेट एक्सेस करता है। यानी वायरलेस होने के बावजूद यह तकनीक इंटरनेट के लिए टावर पर ही निर्भर है। यह तकनीक उन जगहों पर काफी मददगार होता है जहां कंपनी ब्रॉडबैंड फाइबर केबल नहीं बिछा सकती या टावर नहीं लगा सकती।

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    जानें क्या है Starlink

    स्टारलिंक भारत में मिलने वाले एयरफाइबर से बहुत अलग है। जहां एयरफाइबर में इंटरनेट पहुंचाने के लिए टावर की जरूरत पड़ती है, वहीं स्टारलिंक पूरी तरह से वायरलेस है, यानी इसमें न ही फाइबर केबल और न ही टावर की जरूरत पड़ती है। इसके साथ आने वाला एक छोटा सा डिवाइस सीधे सैटेलाइट से इंटरनेट लेकर आपके घर तक पहुंचाता है। यह टेक्नोलॉजी उन जगहों में बहुत काम आ सकती है जहां मोबाइल टावर लगाने या केबल बिछाने की जगह न हो। पहाड़ी और जंगली इलाकों में यह टेक्नोलॉजी काफी कारगर साबित हो रही है।

    फोन पर सीधे नहीं चलेगा सैटेलाइट इंटरनेट
    फोन पर सीधे नहीं चलेगा सैटेलाइट इंटरनेट - फोटो : FREEPIK

    स्टारलिंक लो-अर्थ ऑर्बिट में घूमने वाले स्पेसएक्स (SpaceX) सैटेलाइट से इंटरनेट लेता है। मौजूदा समय में 7 हजार से ज्यादा स्टारलिंक सैटेलाइट काम कर रहे हैं। जिनकी मदद से दूर-दराज वाले इलाकों में इंटरनेट पहुंचाया जा रहा है। इसे यूज करने के लिए आपको अपने घर में एक रिसीवर (एंटिना) लगाना होगा जो सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होगा और इंटरनेट प्रदान करेगा। इससे आप अपने मोबाइल, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप और कंप्यूटर को कनेक्ट कर पाएंगे।

    क्या मोबाइल फोन पर सीधे चलेगा सैटेलाइट इंटरनेट

    जैसा की हमने पहले बताया कि इसे चलाने के लिए आपको अपने घर में रिसीवर लगाना होगा। इसी रिसीवर से आपके डिवाइस कनेक्ट होंगे और उन्हें इंटरनेट मिलेगा। जानकारी के मुताबिक यह रिसीवर पोर्टेबल होगा जिसे आप अपने साथ कहीं भी ले जा सकते हैं। इसे चलाने के लिए आपको बिजली की कनेक्शन की जरूरत होगी।