Report: बदल रहा है भारत की कंपनियों का हिसाब-किताब, सैलरी और पेरोल में बढ़ रहा है एआई का दबदबा

Suyash Pandey
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Tue, 17 Mar 2026 02:25 PM IST
सार

AI Payroll India:

भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से पेरोल और सैलरी सिस्टम की तस्वीर बदल रहा है। 34% कंपनियां जल्द ही इसे पूरी तरह अपनाने जा रही हैं। इस आर्टिकल में पढ़िए कि कैसे एआई सैलरी, टैक्स और ओवरटाइम के मुश्किल कैलकुलेशन को चुटकियों में आसान बना रहा है और डेटा सिक्योरिटी जैसी कौन सी चुनौतियां अब भी कंपनियों का रास्ता रोके खड़ी हैं।

AI Transforming Payroll in India: 34% Companies Plan Full Automation Amid Data Security Concerns
एआई - फोटो : एआई

    विस्तार

    भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब सिर्फ चैटबॉट्स से बात करने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि यह तेजी से कॉर्पोरेट दुनिया के अहम हिस्सों में अपनी मजबूत जगह बना रहा है। खासतौर पर कंपनियों के पेरोल प्रोसेस- यानी सैलरी और कर्मचारियों के भत्तों के हिसाब-किताब में एआई का इस्तेमाल बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 34 प्रतिशत कंपनियां आने वाले समय में अपने पेरोल सिस्टम को पूरी तरह से एआई से लैस करने की तैयारी में हैं। तकनीक के इस दखल से अब डेटा एंट्री, टैक्स और ओवरटाइम का कैलकुलेशन काफी आसान हो गया है। इतना ही नहीं, स्टाफ की कमी जैसी बड़ी चुनौती को दूर करने के लिए भी एआई एक मजबूत हथियार बनकर उभर रहा है। हालांकि, काम की इस रफ्तार और सहूलियत के बीच कंपनियों के लिए डेटा सिक्योरिटी अभी भी एक मुख्य चिंता का विषय बनी हुई है।

    पेरोल में एआई क्या काम कर रहा है?

    पेरोल प्रोसेस में एआई के काम करने के तरीके पर नजर डालें तो एचआर सॉल्यूशंस कंपनी ADP की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में करीब आधी कंपनियां इसकी मदद से अपने कई भारी-भरकम कामों को आसान कर रही हैं। एआई अब डेटा एंट्री जैसे उबाऊ और रोजमर्रा के कामों को ऑटोमेट कर रहा है। इसके इस्तेमाल से न सिर्फ कर्मचारियों के टैक्स, बेनिफिट्स और ओवरटाइम की एकदम सटीक गिनती की जा रही है, बल्कि यह भविष्य में कंपनी के ऑडिट और नियमों के पालन की प्रक्रिया को भी बेहद आसान बना रहा है। इस तकनीकी बदलाव पर ADP इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल गोयल का कहना है कि जब एआई रोज-रोज दोहराए जाने वाले इन कामों की जिम्मेदारी संभाल लेगा तो कंपनियों की पेरोल टीम अपना पूरा फोकस डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने और कंपनी के लिए बेहतर फैसले लेने पर लगा सकेगी।

    एआई का एक बड़ा फायदा: फ्रॉड डिटेक्शन

    कंपनियां अब एआई का इस्तेमाल सिर्फ काम को तेज करने के लिए नहीं कर रही हैं, बल्कि इसके जरिए धोखाधड़ी को पकड़ने और तेजी से रिपोर्ट तैयार करने का काम भी लिया जा रहा है। इससे कंपनियों के समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

    कंपनियों के सामने क्या हैं चुनौतियां?

    हालांकि, पेरोल प्रोसेस में एआई के आने से कंपनियों के लिए सब कुछ सिर्फ आसान ही नहीं हुआ है, बल्कि उनके सामने कुछ नई और बड़ी चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। एशिया-पैसिफिक रीजन के आंकड़ों पर गौर करें तो 74 प्रतिशत पेरोल लीडर्स यह मानते हैं कि स्किल्ड स्टाफ की कमी उनके काम पर सीधा असर डाल रही है। इस समस्या से निपटने के लिए करीब 80 प्रतिशत कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ काम चलाने की दिशा में एआई का सहारा लेना चाहती हैं। लेकिन, एआई को पूरी तरह से अपनाने में सबसे बड़ा रोड़ा डेटा सिक्योरिटी का डर बना हुआ है। लगभग 79 प्रतिशत कंपनियों का यह कहना है कि डेटा सुरक्षा से जुड़े कड़े नियमों और प्राइवेसी की चिंताओं के कारण उन्हें अपने सिस्टम में एआई को तेजी से लागू करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    आगे क्या होगा?

    इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को नई चीजें सिखाने पर जोर दे रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 33% कंपनियों का मानना है कि अगले 2-3 वर्षों में उनके पेरोल सिस्टम को पूरी तरह से बदलने में एआई सबसे बड़ा ड्राइवर साबित होगा। साथ ही, अब ज्यादातर फोकस डेटा को सुरक्षित रखने की नई नीतियां बनाने पर है। कुल मिलाकर, एआई अब एचआर और पेरोल टीमों के लिए एक स्मार्ट असिस्टेंट बन चुका है, जो काम की स्पीड और एक्यूरेसी दोनों बढ़ा रहा है।