एआई नौकरियां पांच गुना बढ़ीं: एआई के दौर में रोजगार का चेहरा बदल गया, कोडिंग से आगे बढ़ी हुनर की मांग

आईटी क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए अब सिर्फ कोडिंग जानना काफी नहीं है। कंपनियां ऐसे युवाओं की तलाश कर रही हैं, जो एआई की मदद से काम तेजी से पूरा करने के साथ तैयार किए कोड व जवाबों की खामियां भी पकड़ सकें। यानी एआई का इस्तेमाल करना ही नहीं, नतीजों की जांच व सुधार करना भी जरूरी होगा।
रैंडस्टैड की वैश्विक टेक टैलेंट रिपोर्ट में एआई कौशल की मांग वाली शुरुआती स्तर की टेक नौकरियां 2025 के मुकाबले पांच गुना हो गई हैं। वहीं, दुनिया की कुल एआई टेक नौकरियों में भारत की हिस्सेदारी करीब 20.5 फीसदी है। यानी दुनिया की हर पांचवीं एआई टेक नौकरी भारत में है। 2021 के मुकाबले 2026 की शुरुआत तक भारत में एआई कौशल वाले डेवलपर की मांग 660 फीसदी से अधिक बढ़ी है। रैंडस्टैड के प्रबंध निदेशक मिलिंद शाह के मुताबिक, टेक क्षेत्र में भर्ती का जोर अब केवल डिग्री के बजाए उम्मीदवार के वास्तविक कौशल पर है। एआई की समझ अब तकनीकी पदों तक सीमित नहीं है। सेल्स, एचआर व मार्केटिंग जैसे विभागों में भी जानकारी रखने वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ी है।
इंटरव्यू में परखी जा रही एआई की समझ
ब्लैकस्ट्रॉ डॉट एआई के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अतुल आर्य के अनुसार, कंपनियां अब उम्मीदवारों को किताबी सवालों के बजाय वास्तविक समस्याएं देकर उनकी क्षमता परख रही हैं। कई बार एआई औजारों के इस्तेमाल की छूट भी दी जाती है। ऐसे में यह देखा जाता है कि उम्मीदवार समस्या को कैसे समझता है, एआई से किस तरह सवाल पूछता है।
कोडिंग का तरीका बदला, जिम्मेदारी नहीं
एआई से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का काम खत्म नहीं हो रहा, बल्कि उसका तरीका बदल रहा है। डेवलपर को एआई से तैयार कोड की जांच करनी होती है कि वह सही, सुरक्षित व जरूरत के मुताबिक है या नहीं। इसलिए फ्रेशर्स के लिए तकनीकी विषयों की समझ, समस्या सुलझाने की क्षमता व सीखते रहने की आदत जरूरी है।