पांच साल में आधी शुरुआती नौकरियां खत्म कर सकता है एआई: एंथ्रोपिक सीईओ ने दी चेतावनी, किन पेशों पर होगा असर?
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई का अनुमान है कि आने वाले पांच वर्षों में एआई वकीलों, सलाहकारों और फाइनेंस प्रोफेशनल्स के लिए एंट्री-लेवल की आधी नौकरियां खत्म कर देगा। आइए जानते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा है।

विस्तार
एआई तेजी से आगे है और इसका असर अब केवल तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले वर्षों में यह वकीलों, सलाहकारों और फाइनेंस प्रोफेशनल्स जैसे क्षेत्रों में काम करने के तरीकों को भी बदल सकता है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेईका अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में एआई इन क्षेत्रों की एंट्री-लेवल नौकरियों में से आधी को खत्म कर सकता है। उनका मानना है कि बेसिक एनालिसिस और समरी तैयार करने जैसे कामों में एआई लगातार बेहतर हो रहा है। हालांकि, इससे बीमारी से जुड़े रिसर्च जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं भी खुल सकती हैं। अमोदेई का यह भी कहना है कि एआई की क्षमताओं का अंदाजा लगाते समय हम अक्सर उसकी भविष्य की रफ्तार को कम आंकते हैं। आखिर एआइ र्कि तनी तेजी से बदल रहा है और इसका नौकरियों पर क्या असर पड़ सकता है? आइए समझते हैं।
पांच साल में आधी एंट्री-लेवल नौकरियां खत्म कर सकता है एआई
- एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने आने वाले पांच वर्षों में रोजगार बाजार में बड़े बदलाव की शंका जताई है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि पांच वर्षो में एआई वकीलों, सलाहकारों और फाइनेंस प्रोफेशनल्स के लिए एंट्री-लेवल की आधी नौकरियों को खत्म कर सकता है।
- इन क्षेत्रों में शुरुआती स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को आमतौर पर जानकारी जुटाने, दस्तावेजों का विश्लेषण करने, रिपोर्ट तैयार करने और जरूरी तथ्यों का सार बनाने जैसे काम करने पड़ते हैं। अमोदेई के मुताबिक, एआई इन बुनियादी कामों में तेजी से बेहतर हो रहा है। ऐसे में कंपनियां इन कामों के लिए इंसानी कर्मचारियों पर अपनी निर्भरता कम कर सकती हैं।
- हालांकि, यह अमोदेई का भविष्य को लेकर लगाया गया अनुमान है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन क्षेत्रों की आधी नौकरियां खत्म होने का फैसला हो चुका है या ऐसा होना तय है।
बेसिक एनालिसिस और समरी बनाने में एआई को बढ़त
- साक्षात्कार में ही उन्होंने कहा कि एआई की मौजूदा क्षमताओं में तेजी से सुधार हो रहा है। खासकर जानकारी को समझने, उसका एनालिसिस करने और लंबी रिपोर्ट या दस्तावेजों का सार तैयार करने जैसे कामों में ये मॉडल बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
- वकीलों, सलाहकारों और फाइनेंस प्रोफेशनल्स के शुरुआती करियर में ऐसे कामों की अहम भूमिका होती है। अगर एआई इन्हें तेजी और कम लागत में करने लगेगा, तो कंपनियों के काम करने का तरीका बदल सकता है। इसका असर उन लोगों पर सबसे पहले पड़ सकता है, जो इन क्षेत्रों में अपना करियर शुरू कर रहे हैं।
- हालांकि, किसी पेशे में सिर्फ बुनियादी एनालिसिस ही पूरा काम नहीं होता। फैसले लेने, ग्राहकों को समझने और जटिल परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने जैसे कामों की जरूरत भी बनी रहती है। इसलिए AI का असर हर भूमिका पर एक जैसा होगा, यह कहना अभी मुश्किल है।
एआई से कुछ क्षेत्रों में खुल सकती हैं नई संभावनाएं
- एआई को लेकर चिंता सिर्फ नौकरियों तक सीमित नहीं है। इसके बढ़ते इस्तेमाल से कुछ ऐसे क्षेत्रों में भी काम तेज हो सकता है, जहां रिसर्च में काफी समय लगता है।
- अमोदेई के अनुसार, बीमारी से जुड़े रिसर्च जैसे क्षेत्रों को एआई की प्रगति से बढ़ावा मिल सकता है। बेहतर एआई मॉडल जटिल जानकारियों को समझने और विश्लेषण करने में मदद कर सकते हैं। इससे वैज्ञानिकों और रिसर्च करने वालों के काम को गति मिल सकती है। यानी एक तरफ एआई कुछ शुरुआती नौकरियों की जरूरत कम कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ रिसर्च और दूसरे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करने की क्षमता भी रखता है।
- एंथ्रोपिक एआई के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है और अरबों डॉलर का रेवेन्यू हासिल कर रही है। कंपनी की कारोबारी प्रगति के बीच एआई के रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चर्चा तेज है।
- एक तरफ एआई कंपनियां अपने मॉडल्स को लगातार बेहतर बना रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल उठ रहा है कि अगर ये मॉडल इंसानों के कई काम करने लगे, तो शुरुआती स्तर पर नौकरी पाने वाले युवाओं के लिए मौके कितने रह जाएंगे।
- हालांकि, इस विषय पर एक राय नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि एआई नौकरियों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उनके काम करने के तरीके को बदल सकता है। यानी कई पेशों में इंसानों की भूमिका खत्म होने के बजाय बदल सकती है और कर्मचारियों को नई तरह की स्किल्स सीखने की जरूरत पड़ सकती है।
छह महीने में आसान हो सकते हैं आज के मुश्किल काम
- डारियो अमोदेई का मानना है कि एआई की क्षमताओं को केवल आज के प्रदर्शन के आधार पर नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मॉडल्स की जो भी सीमाएं हैं, आज जो काम मुश्किल लगते हैं, वे आने वाले छह महीनों में इन मॉडल्स के लिए बहुत आसान हो सकते हैं।
- उनके मुताबिक, आज से 12 महीने बाद ऐसे काम भी एआई मॉडल्स नियमित रूप से करने लगेंगे, जिन्हें फिलहाल असंभव माना जा रहा है। यह बयान एआई की तेजी से बढ़ती क्षमताओं की ओर इशारा करता है। लगातार बेहतर होते मॉडल्स की वजह से किसी काम में आज एआई की सीमाएं कुछ महीनों बाद बदल सकती हैं। ऐसे में कंपनियों और कर्मचारियों को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा।
GPT-2 से समझ आया एआई स्केलिंग लॉ का महत्व
- अमोदेई ने एआई के विकास को याद करते हुए GPT-2 का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, GPT-2 'एआई स्केलिंग लॉ' यानी एआई स्केलिंग नियमों की परिकल्पना को परखने का पहला वास्तविक परीक्षण साबित हुआ था।
- एआई स्केलिंग लॉ का संबंध इस विचार से है कि मॉडल्स को बड़े पैमाने पर विकसित करने और उनकी ट्रेनिंग के लिए अधिक संसाधन लगाने से उनकी क्षमताओं में सुधार हो सकता है। GPT-2 के अनुभव ने इस परिकल्पना को वास्तविक मॉडल के जरिए परखने का मौका दिया।
- अमोदेई का कहना है कि हम अक्सर एआई की क्षमताओं को कम आंकते हैं, क्योंकि हमारा ध्यान इस बात पर रहता है कि वह आज क्या कर सकता है। जबकि लगातार स्केलिंग और सुधार के बाद भविष्य में वही मॉडल कहीं ज्यादा जटिल काम करने में सक्षम हो सकता है।